रायपुर कमिशनरेट की नई पहल: अपराध पर लगाम के लिए आदतन अपराधियों से भरवाया जा रहा बॉन्ड 

रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अपराध पर लगाम के लिए नई पहल शुरू की गई है. पुलिस आदतन अपराधियों से बॉन्ड भरवा रही है, ताकि वे दोबारा अपराध न करें. अब तक 1000 से ज्यादा अपराधियों से बॉन्ड लिया जा चुका है.

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Raipur Police Commissionerate News: रायपुर में बढ़ते अपराध को काबू करने के लिए पुलिस ने एक नई सख्त पहल शुरू की है. पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अब आदतन अपराधियों से बॉन्ड भरवाए जा रहे हैं, ताकि वे भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर रहें. पुलिस का दावा है कि इस कदम से अपराध के ग्राफ में कमी आएगी, लेकिन धरना‑प्रदर्शन करने वालों से भी बॉन्ड लेने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.

अपराध रोकने के लिए पुलिस की नई रणनीति

ढाई महीने पहले रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी. इसके बाद पुलिस ने अपराध पर रोक लगाने के लिए अलग‑अलग स्तर पर कार्रवाई शुरू की. इसी कड़ी में अब पुलिस ने आदतन अपराधियों पर दबाव बनाने के लिए बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया अपनाई है.

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आदतन अपराधियों से शपथ और बॉन्ड

पुलिस के मुताबिक, अपराधी दो तरह के होते हैं. कुछ लोग आवेश में आकर अपराध कर बैठते हैं, जबकि कुछ आदतन अपराधी बार‑बार कानून तोड़ते हैं. ऐसे आदतन अपराधियों से शपथ पत्र के साथ बॉन्ड भरवाया जा रहा है, जिसमें वे यह लिखकर देते हैं कि आगे किसी अपराध में शामिल नहीं होंगे. यदि वे दोबारा अपराध करते हैं, तो उनका बॉन्ड जब्त कर लिया जाएगा.

1000 से ज्यादा अपराधियों से भरवाया बॉन्ड

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी तक रायपुर में एक हजार से ज्यादा आदतन अपराधियों से बॉन्ड भरवाए जा चुके हैं. पुलिस का मानना है कि आर्थिक दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर से ऐसे लोग अपराध से दूर रहेंगे. रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला का कहना है कि बॉन्ड की प्रक्रिया का मकसद सजा देना नहीं, बल्कि अपराध को रोकना है. पुलिस का मानना है कि लगातार अपराध करने वालों पर यह कदम असरदार साबित हो सकता है.

धरना‑प्रदर्शन करने वालों से भी बॉन्ड, उठे सवाल

हालांकि, इस पहल पर तब सवाल उठने लगे जब सामने आया कि पुलिस ने धरना‑प्रदर्शन करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों से भी बॉन्ड भरवाए हैं. इससे यह बहस शुरू हो गई है कि कहीं इस प्रक्रिया का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने के लिए तो नहीं हो रहा.

डीएड संघ ने जताई आपत्ति

डीएड संघ के अध्यक्ष संजय कश्यप ने बताया कि उनसे भी एक लाख रुपये का बॉन्ड भरवाया गया, जिसमें सत्र के दौरान प्रदर्शन नहीं करने की शर्त लगाई गई. संघ ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध‑प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है.

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बॉन्ड से अपराध में कमी या अधिकारों पर अंकुश?

पुलिस का दावा है कि बॉन्ड भरवाने से अपराध में कमी आएगी, लेकिन प्रदर्शनकारियों से भी बॉन्ड लेने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह पहल सिर्फ अपराध रोकने तक सीमित है, या फिर इसका दायरा जरूरत से ज्यादा बढ़ाया जा रहा है.