Raigarh Lotus City Colony: रायगढ़ शहर के वार्ड क्रमांक 47 बिजेपुर में निर्माणाधीन लोटस सिटी कॉलोनी के नाम पर वर्षों से बसे गरीब परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडराने लगा है. तहसीलदार रायगढ़ के न्यायालय से अतिक्रमण हटाने का नोटिस मिलने के बाद लोटस सिटी कॉलोनी के पास निवास कर रहे गरीब परिवारों में दहशत का माहौल है. प्रभावित परिवारों का कहना है ये जमीन राज परिवार का हुआ करता था, जिसे राजा ने अग्रवाल परिवार को दिया था. हम सब पिछले 30 वर्षों से यहां शांतिपूर्वक निवास कर रहे हैं और तत्कालीन भूमि स्वामी सुशील अग्रवाल द्वारा उन्हें बसाया गया था.
इन परिवारों को मिला नोटिस
नोटिस मिलते ही पीड़ित परिवारों ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा रखी. मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों में कुछ को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिल चुका है, जो प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करता है. निवासियों का दावा है कि कॉलोनी की नाप-जोख 10 से 12 बार हो चुकी, लेकिन कभी भी उन्हें हटाने की बात नहीं कही गई.
स्थानीय निवासी प्रमोद महापात्र का कहना है कि अब कॉलोनी विकसित होते ही उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाने की तैयारी की जा रही है. आरोप है कि कॉलोनाइजर द्वारा 15 साल पुरानी सीसी रोड को मिट्टी से पाट दिया गया और 5-6 साल पहले बनी नाली को भी बंद कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन गई है. घरों के सामने मिट्टी के ढेर और पानी छोड़कर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है. स्थानीय पार्षद की निष्क्रियता से लोगों में आक्रोश है.
बिल्डर सुरेश रोहड़ा ने अवैध कब्जा बताया
वहीं बिल्डर सुरेश रोहड़ा से फोन कॉल पर हुई बात आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे निजी भूमि पर अवैध कब्जा बताया है. तहसीलदार शिव डानसेना ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय लिया जाएगा. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉलोनी विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ा जा रहा है, या फिर यह प्रशासनिक प्रक्रिया है? फैसला न्यायालय के हाथ में है.
स्थानीय लोगों ने कहा- ' 30 साल से यहां रह रहे'
स्थानीय निवासी प्रमोद महापात्र ने कहा, “हम 30 साल से यहां रह रहे हैं, अब अचानक अतिक्रमणकारी कहकर हटाया जा रहा है, जबकि हमें सुशील अग्रवाल ने बसाया था.”
बिल्डर सुरेश रोहड़ा ने कहा कि निजी जमीन पर कब्जा हुआ है, सीमांकन के बाद ही नोटिस दिए गए हैं.
वहीं रायगढ़ तहसीलदार शिव डानसेना ने मामला न्यायालय में है, दोनों पक्षों को सुनकर निर्णय लिया जाएगा.
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