छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत सिटी कोतवाली पुलिस ने चार महीने से फरार चल रहे आरोपी दीपक शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर ट्रांसपोर्ट कंपनी से लाखों रुपये निकालने का आरोप है. पुलिस जांच में डुप्लीकेट वाउचर, फर्जी वाहन नंबर और विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों के जरिए रकम निकालने का खुलासा हुआ था. मुखबिर की सूचना पर आरोपी को दरोगापारा क्षेत्र से पकड़ा गया. पूछताछ में उसने अपने साथी के साथ मिलकर धोखाधड़ी को अंजाम देने की बात स्वीकार की है.
श्रीराम ट्रांसपोर्ट से 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी
मामला ढिमरापुर चौक स्थित श्रीराम ट्रांसपोर्ट से जुड़ा है. कंपनी संचालक कमल किशोर शाह ने 24 मार्च को सिटी कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया था कि कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे. भुगतान प्रक्रिया के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर जब रिकॉर्ड की जांच की गई, तब बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. जांच में पता चला कि सितंबर 2025 से लगातार डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा था.
Shriram Transport Fraud Case: गिरफ्तार आरोपी
डुप्लीकेट वाउचर और फर्जी वाहन नंबरों का खेल
पुलिस जांच के अनुसार एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से भुगतान करवाया गया. आरोपियों ने फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर ट्रांसपोर्ट भुगतान की राशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाई. जांच के दौरान प्रस्तुत बिलों और वाउचरों में अंकित वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से कराया गया. सत्यापन में कई वाहन नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका माल परिवहन या श्रीराम ट्रांसपोर्ट से कोई संबंध नहीं था. वाहन मालिकों ने भी पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी उक्त ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए परिवहन कार्य नहीं किया.
कई बैंक खातों का किया गया इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की राशि धोखाधड़ी से निकाली गई. इसके लिए संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता सहित कई लोगों के बैंक खातों का उपयोग किया गया. रकम को विभिन्न खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए ट्रांसफर किया गया. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरी साजिश सुनियोजित तरीके से रची गई थी.
मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी
एफआईआर दर्ज होने के बाद से सिटी कोतवाली पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी दीपक शर्मा अपने मोहल्ले दरोगापारा में देखा गया है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया. पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह श्रीराम ट्रांसपोर्ट के ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था और विभिन्न वाहन नंबरों के आधार पर भुगतान कराता था.
पूछताछ में किया बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में दीपक शर्मा ने बताया कि धोखाधड़ी से प्राप्त राशि आरोपियों के बीच बांटी जाती थी. उसने यह भी स्वीकार किया कि रकम का कुछ हिस्सा उसने अपनी मां के इलाज पर खर्च किया, जबकि शेष राशि निजी जरूरतों और अन्य खर्चों में इस्तेमाल की गई. पुलिस के मुताबिक आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत इस प्रकरण की जांच जारी है. पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) और 60 के तहत अपराध दर्ज किया है. गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है.
फर्जी भुगतान नेटवर्क पर पुलिस की नजर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध का मामला प्रतीत होता है. डिजिटल ट्रांजैक्शन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया. अब जांच का फोकस इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और रकम के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर है.
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