पीएम मोदी के ‘मन की बात’ में गूंजा मल्हार का गौरव, यहां की 1500 वर्ष पुरानी ताम्र पट्टिकाओं का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 134वें संस्करण में बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक नगर मल्हार का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत यहां मिली प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रमाण बताया.

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प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में गूंजा बिलासपुर के मल्हार का गौरव
prafulla Tiwari

Malhar History: बिलासपुर (Bilaspur) जिले के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के नगर मल्हार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात' के 134वें संस्करण में मल्हार का उल्लेख करते हुए यहां मिली प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया. प्रधानमंत्री ने ‘ज्ञान भारतम् अभियान' के तहत हुई इस महत्वपूर्ण खोज का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में सामने आ रही ऐसी धरोहरें भारत के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर रही हैं.

जानकारी के अनुसार मल्हार में प्राप्त ये दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं कई दशक पहले क्षेत्र के एक किसान को खेत में मिली थीं. बाद में ये पट्टिकाएं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय छेदीलाल पांडेय के पास पहुंचीं. उन्होंने इसके ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए इन्हें वर्षों तक सुरक्षित संरक्षित रखा. उनके परिवार की ओर से इस धरोहर को संभालकर रखने के कारण आज यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के अध्ययन का विषय बन सका है.

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ब्राह्मी और पाली भाषा में लेख है अंकित

विशेषज्ञों के अनुसार ये ताम्र पट्टिकाएं पांडुवंशी राजवंश के महान शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन के शासनकाल से संबंधित हैं. इनकी आयु लगभग 1400 से 1500 वर्ष आंकी गई है. इनका संबंध छठी-सातवीं शताब्दी से माना जाता है. इन पर ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लेख अंकित हैं. इतिहासकारों का मानना है कि इन अभिलेखों से उस काल की शासन व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे, भूमि दान व्यवस्था, सामाजिक जीवन, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं.

इन कामों के लिए होता था ताम्रपत्रों का उपयोग

प्राचीन भारत में ताम्र पत्रों का उपयोग राजकीय आदेश, भूमि दान, कर संबंधी घोषणाओं और धार्मिक संस्थाओं को दिए गए अधिकारों को दर्ज करने के लिए किया जाता था. इसलिए ऐसे ताम्रपत्र इतिहास के अत्यंत प्रामाणिक दस्तावेज माने जाते हैं. इनका अध्ययन किसी भी कालखंड के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

सबसे प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है मल्हार

मल्हार स्वयं छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है. प्राचीन दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक राजधानी रहे इस नगर से पहले भी अनेक प्राचीन मंदिरों के अवशेष, मूर्तियां, सिक्के, शिलालेख और पुरावशेष प्राप्त हो चुके हैं. यही कारण है कि मल्हार को छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

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प्रधानमंत्री की ओर से राष्ट्रीय मंच से मल्हार का उल्लेख किए जाने के बाद क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है. स्थानीय नागरिकों, इतिहास प्रेमियों और जनप्रतिनिधियों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया है. लोगों का कहना है कि इससे मल्हार की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी तथा पर्यटन, पुरातात्विक अनुसंधान और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

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