Padma Shri Award 2026: पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा, छत्तीसगढ़ के इन 3 हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

Padma Shri Award 2026: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. इस बार छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का अवसर है, क्योंकि राज्य से तीन लोगों का चयन पद्म सम्मान के लिए किया गया है.पद्म पुरस्कार पाने वालों में समाजसेविका बुधरी ताती और चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले व सुनीता गोडबोले शामिल हैं.

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Padma Shri Award 2026 Announced: 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस से पहले कर दी गई है. साल 2026 के पुरस्कारों की लिस्ट में छत्तीसगढ़ की 3 हस्तियों के नाम शामिल हैं. इन सभी को पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा. हालांकि एक पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया जाएगा. इसमें नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा से 2 शामिल हैं.

दरअसल, बस्तर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित इलाके में वर्षों से निस्वार्थ सेवा कर रहे तीन लोगों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है. इनमें समाजसेविका बुधरी ताती, चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और सुनीता गोडबोले शामिल हैं.

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बस्तर की 'बड़ी दीदी' बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान

दंतेवाड़ा के हीरानार गांव में महिला उत्थान और समाज सेवा के लिए बुधरी ताती को पद्मश्री अवार्ड (Budhri Tati receives Padma Shri award) दिया जाएगा. 1984 से लगातार वनांचल क्षेत्र में नशामुक्ति, साक्षरता और आदिवासियों में जागरूकता का काम कर रही है. उन्होंने अपना जीवन आदिवासी बच्चियों की शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बुजुर्गों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया. उन्हें लोग सम्मान से 'बड़ी दीदी' कहते हैं.

पति-पत्नी को पद्मश्री अवार्ड, दुर्गम आदिवासी इलाकों में दे रहे सेवा

डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को यह चिकित्सा के क्षेत्र में पद्मश्री अवार्ड दिया जाएगा. पति-पत्नी पिछले 37 वर्षों से अधिक समय से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवा दे रहे हैं. बता दें कि डॉ. रामचंद्र त्र्यंबक गोडबोले एक आयुर्वेद चिकित्सक हैं और वो अपनी पत्नी सुनीता गोडबोले के साथ मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता और कुपोषण के खिलाफ लगातार काम कर रहे हैं.

दोनों ने मिलकर 'ट्रस्ट फॉर हेल्थ' के माध्यम से ऐसे गांवों तक इलाज पहुंचाया, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क तक नहीं है. वो खुद पैदल और साधनों के सहारे इन इलाकों में जाकर स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और मरीजों का इलाज करते हैं. 

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