रायपुर में आयोजित NDTV (MP-CG) के मेगा कॉन्क्लेव "इमर्जिंग छत्तीसगढ़: सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश" में विकास, निवेश, महिला सशक्तिकरण, नक्सलमुक्त बस्तर, संस्कृति और प्रदेश की राजनीति जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई. इस विशेष मंच पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत कई प्रमुख हस्तियों ने प्रदेश के भविष्य का विजन साझा किया. वहीं कला, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी अपने अनुभवों और विचारों से कार्यक्रम को खास बनाया.
तेजन बाई को श्रद्धांजलि से हुई शुरुआत
कॉन्क्लेव की शुरुआत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की पहचान और पंडवानी गायन की महान कलाकार तेजन बाई को श्रद्धांजलि देकर की गई. उनकी शिष्या तरुणा साहू ने मंच पर पंडवानी की प्रस्तुति दी और अपनी गुरु को याद करते हुए उनकी कला और योगदान को नमन किया. इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग से भर दिया.
मुख्यमंत्री साय ने रखी नए छत्तीसगढ़ की रूपरेखा
"महतारी शक्ति, नए छत्तीसगढ़ की शक्ति" सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि जबरन धर्मांतरण के मामलों में नए कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है. रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 20 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी दी गई है, जबकि 5 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है.
बस्तर के विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है. अब वहां विकास कार्यों को गति दी जा रही है. उन्होंने बताया कि बस्तर में 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है. साथ ही रोजगार और कौशल विकास के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. सुरक्षा कैंपों को अब "सेवा डेरा" के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां प्रशिक्षण और जनसुविधाओं से जुड़े कार्य होंगे.
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर चर्चा
कॉन्क्लेव के "नारी नेतृत्व और समृद्ध छत्तीसगढ़" सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, रायपुर महापौर मीनल चौबे और आर. संगीथा ने भाग लिया. इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई. वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण को प्रदेश के विकास की आधारशिला बताया.
अरुण साव ने विकास कार्यों का ब्यौरा दिया
"विकास से विश्वास तक" सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेश में चल रहे अधोसंरचना विकास कार्यों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सड़क, पुल, पुलिया और भवन निर्माण के लिए लगभग 13 हजार करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.
राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की. अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के प्रदर्शन को उचित नहीं कहा जा सकता.
संस्कृति और सामाजिक बदलाव पर संवाद
"संस्कृति से समृद्धि तक" सत्र में लोक गायक दिलीप षंडगी और सामाजिक कार्यकर्ता फूलबासन बाई यादव ने अपने अनुभव साझा किए. चर्चा में ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता, महिला नेतृत्व और लोक संस्कृति के संरक्षण जैसे विषय प्रमुख रहे. फूलबासन बाई ने कहा कि सामाजिक कार्य के शुरुआती दिनों में उन्हें काफी विरोध और ताने सुनने पड़े, लेकिन आज उसी संघर्ष की बदौलत उन्हें सम्मान मिल रहा है.
डॉ. रमन सिंह ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन
"छत्तीसगढ़ भारत के भविष्य का केंद्र" विषय पर चर्चा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि देश में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" जैसी व्यवस्था समय और धन दोनों की बचत कर सकती है.
उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में छत्तीसगढ़ का बजट करीब 3 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1 लाख 65 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. डॉ. सिंह ने बताया कि महतारी वंदन योजना से 70 लाख महिलाओं को लाभ मिला है और वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है.
विजय शर्मा ने बताया नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप
"सुरक्षित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़" सत्र में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियान की जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि देश के कुल नक्सलवाद का बड़ा हिस्सा कभी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय था और इसे खत्म करना आसान नहीं था.
विजय शर्मा ने बताया कि सुरक्षा कार्रवाई, संवाद, पुनर्वास और स्थानीय सहयोग को साथ लेकर रणनीति बनाई गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए. उन्होंने दावा किया कि अब बस्तर के कई क्षेत्रों के लोग पहली बार रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं को देख और समझ पा रहे हैं.
केदार कश्यप ने बताई कनेक्टिविटी की तस्वीर
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से सड़क निर्माण हो रहा है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण बस सेवा और अन्य योजनाओं के जरिए दूर-दराज के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है. धर्मांतरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पहले कई क्षेत्रों में सामाजिक तनाव की स्थिति बन जाती थी, लेकिन नए कानूनों और जागरूकता अभियानों से इसमें कमी आई है.
समाज के प्रेरक लोगों का हुआ सम्मान
कॉन्क्लेव के दौरान सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य केवल नीतियों और राजनीति पर चर्चा करना नहीं था, बल्कि उन लोगों को मंच देना भी था जो जमीनी स्तर पर बदलाव की कहानी लिख रहे हैं.