Anti Naxal Operation in Chhattisgarh: बस्तर के जंगलों से नक्सलवाद के खात्मे की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. भारत सरकार के संकल्प '31 मार्च 2026 नक्सल मुक्त बस्तर' को हकीकत में बदलने के लिए सुरक्षा बल अब नक्सलियों के उस अभेद्य किले में घुस चुके हैं, जिसे 'अबूझमाड़' कहा जाता है. नारायणपुर के खोड़पार इलाके में ITBP और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है. पहाड़ों में दो पत्थरों के बीच छिपी नक्सलियों की 'मौत की फैक्ट्री' को जवानों ने ध्वस्त कर दिया है. रॉकेट लॉन्चर से लेकर थ्री-नॉट-थ्री राइफल्स तक, हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है.
लाल आतंक के खिलाफ निर्णायक जंग अब अपने सबसे कठिन और अंतिम पड़ाव पर है. अबूझमाड़ जिसके घने जंगलों को कभी नक्सली अपनी सुरक्षित पनाहगाह मानते थे, अब वहां सुरक्षा बलों की धमक सुनाई दे रही है. ITBP की 29वीं वाहिनी और जिला पुलिस बल ने एक संयुक्त प्रहार करते हुए नक्सलियों की कमर तोड़ दी है.
Chhattisgarh Naxal: सुरक्षाबलों ने खोड़पार जंगल में नक्सलियों की गुप्त हथियार फैक्ट्री को ध्वस्त किया.
ऑपरेशन की कमान संभाल रहे कमांडेंट दुष्यंत राज जायसवाल और सेकेंड-इन-कमांड दीपक सेमल्टी के नेतृत्व में 58 जांबाज जवानों की टीम ने खोड़पार के जंगलों को चारों ओर से घेर लिया. इसमें इंटेलिजेंस टीम और बम निरोधक दस्ता (BDDS) भी शामिल था. 30 किलोमीटर का कठिन सफर और पहाड़ियों की ओट में छिपे खतरे के बीच जवानों ने नक्सलियों के उस गुप्त ठिकाने को ढूंढ निकाला, जहां पत्थरों की गुफाओं में मौत का सामान छिपाया गया था.
Anti Naxal: बिजली के तारों के बंडल और भारी मात्रा में कटर बरामद.
मौके से जो बरामदगी हुई है, वो चौंकाने वाली है-
- हथियार: थ्री-नॉट-थ्री बंदूकें, भरमार और घातक रॉकेट लॉन्चर
- विस्फोटक: बड़ी संख्या में BGL और UBGL सेल
- उपकरण: बिजली के तारों के बंडल और भारी मात्रा में कटर
नक्सलियों ने इन हथियारों को सुरक्षा बलों पर बड़े हमले के लिए स्टोर कर रखा था, लेकिन जवानों की मुस्तैदी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया. अधिकारियों की मानें तो इस सर्च ऑपरेशन का मकसद सिर्फ हथियार बरामद करना नहीं, बल्कि इलाके के ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव पैदा करना भी है. 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद के नासूर से मुक्त कराने के लिए सुरक्षा बल अब चप्पे-चप्पे को खंगाल रहे हैं. खोड़पार का यह सफल ऑपरेशन इसी दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है. अबूझमाड़ के भीतर घुसकर की गई यह कार्रवाई नक्सलियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है या तो मुख्यधारा में लौटें, या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहें.