नक्सल कमांडर पापा राव कौन? साथ रखता AK 47, कई वर्षों से सुरक्षा बल कर रहे तलाश

Naxalite commander Papa Rao: माओवादी कमांडर पापा राव का पूरा नाम सुन्नम पापाराव है. इसके अलावा मंगू दादा फर्फ चंन्द्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है. पापा राव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है.

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Naxalite commander Papa Rao: बीजापुर के नेशनल पार्क के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ हुई है. DVCM दिलीप बेड़जा समेत कई कुख्‍यात नक्‍सली ढेर हो गए हैं. बीजापुर एनकाउंटर ने एक बार फ‍िर से माओवादी कमांडर पापा राव ढेर को भी चर्चा में ला द‍िया है. पापा राव पर करीब 50 लाख रुपये का इनाम घोषित है. आइए जानते हैं पापाराव के बारे में.

कौन हैं माओवादी कमांडर पापाराव?

माओवादी कमांडर पापा राव का पूरा नाम सुन्नम पापाराव है. इसके अलावा मंगू दादा फर्फ चंन्द्रन्ना के नाम से भी मशहूर है. पापा राव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है. वो नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DSZC) का सदस्य है. पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है. वो अपने साथ AK 47 रखता है और 30-40 नक्सलियों को साथ लेकर चलता है. 

इन हमलों में रहा शामिल

नक्सली कमांडर पापाराव छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाकों, खासकर बीजापुर और सुकमा क्षेत्रों में सक्रिय है और वो बस्तर की जल- -जंगल- जमीन से पूरी तरह वाकिफ है. इसलिए वो हर बार मुठभेड़ से बचकर निकल भागता है. बता दें कि पापाराव भैरमगढ़ वेस्ट बस्तर एरिया कमेटी से जुड़े हमलों में शामिल रहा और सुरक्षा बलों के खिलाफ कई हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे चुका है. उसके खिलाफ पुलिस में 40 से अधिक आपराधिक मामले और गिरफ्तारी वारंट दर्ज हैं. 

'जिंदा या मुर्दा'... सुरक्षाबलों ने पापाराव के लिए बनाया था टारगेट

2026 की शुरुआत में सुरक्षा बलों ने पापाराव को सबसे बड़े टारगेट के रूप में चिन्हित किया था. विशेष टीम DRG का लक्ष्य है कि 31 जनवरी 2026 तक उसे “जिंदा या मुर्दा” पकड़ना या ढेर करना है. सरेंडर नक्सली ने NDTV को बताया था कि पापाराव 25-30 हथियारबंद नक्सली साथियों के साथ जंगल में घूम रहा है. वो सरेंडर को फिलहाल राजी नहीं है.

पापाराव पश्चिम बस्तर और दक्षिण बस्तर में कई गतिविधियों में शामिल रहा. स्थानीय स्तर पर नक्सली संगठन की गतिविधियों को संरक्षित रखने में उसकी अहम भूमिका होती है. बता दें कि बीते कुछ दिन पहले पापाराव की पत्नी उर्मिला (जो एरिया कमेटी की सचिव थी) ढेर हो गई थी, लेकिन पापाराव वहां से भाग निकला.

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