Naxal से मुक्त होता सुकमा: अब गोलियों की गूंज नहीं, विकास की रफ्तार पर सवार हुआ बस्तर का यह जिला

Naxal Free Sukma: छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी नक्सलियों का गढ़ था, अब विकास की नई कहानी लिख रहा है. 2018 बैच के आईपीएस एसपी किरण चव्हाण की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने लगातार ऑपरेशन चलाए और नक्सलियों की पकड़ कमजोर कर दी.

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सुकमा जिले के दोरनापाल-जगरगुंडा के बीच बनकर तैयार हुई सीसी सड़क.

Naxal Free in Chhattisgarh: कभी गोलियों की गूंज से दहला बस्तर का सुकमा… अब विकास की नई कहानी लिख रहा है. जहां कभी पीएलजीए का सबसे मजबूत गढ़ था, वहां अब तिरंगा, स्कूल और सड़कें नजर आ रही हैं. नक्सलवाद के खात्मे की तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले, सुकमा में बदलाव की ये तस्वीर साफ नजर आ रही है.

सुकमा जिला जो कभी नक्सलियों के कोर एरिया के तौर पर जाना जाता था. पूवर्ती, टेकलगुड़ा, जगरगुंडा और रायगुड़ा जैसे इलाके, जहां जाना भी खतरे से खाली नहीं था. हर रास्ते में IED, हर मोड़ पर एंबुश का खतरा, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है.

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500 से ज्यादा नक्सलियों ने कई बार हमला किया

2018 बैच के आईपीएस और मौजूदा एसपी किरण चव्हाण की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने लगातार ऑपरेशन चलाए. टेकलगुड़ा में कैंप खोलना सबसे बड़ा चैलेंज था. 500 से ज्यादा नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर कई बार हमला किया, जिससे 3 जवान भी शहीद हो गए, लेकिन हौसला नहीं टूटा और यही से सुकमा की तकदीर बदली.

नक्सल प्रभावित बुरकापाल गांव में निर्माणाधीन पानी टंकी

सुकमा के एसपी किरण चव्हाण का कहना है कि कोर एरिया में पहुंचना बेहद मुश्किल था, लेकिन रणनीति के तहत हमने कैंप खोले. लगातार ऑपरेशन किए और अब नक्सलियों की पकड़ कमजोर हो चुकी है. पिछले दो सालों में 90 से ज्यादा एनकाउंटर किए गए हैं और 500 से ज्यादा नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा करीब 800 ने सरेंडर किया है.

इन इलाकों में कभी नक्सलियों का था राज

नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का नतीजा यह निकला कि नक्सली संगठन कमजोर हुआ और भर्ती पूरी तरह बंद हो गई. दोरनापाल-जगरगुंडा, भेजी-चिंतागुफा और सिलगेर-पूवर्ती जैसे इलाकों में कभी नक्सलियों का राज था, वहां के रास्ते अब खुल गए हैं. वहां अब सुरक्षाबलों के कैंप और विकास के काम नजर आते हैं.

विकास की ओर सुकमा जिला

कलेक्टर सुकमा अमित कुमार ने बताया कि सिर्फ बंदूक नहीं, अब बस्तर में विकास भी सबसे बड़ा हथियार बन चुका है. माओवाद के कमजोर पड़ते ही अब प्रशासन सैचुरेशन मोड' में काम कर रहा है. यानी हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का 100% लाभ पहुंचाना.

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कलेक्टर का कहना है कि हमारा फोकस है कि कोई भी हितग्राही योजनाओं से वंचित न रहे. सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा पर तेजी से काम हो रहा है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सड़कें बन रही है. जल जीवन मिशन से घर-घर पानी पहुंच रहा है. बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र गांव-गांव तक पहुंच रहे हैं.

जगरगुंडा फोकस

जगरगुंडा… जो कभी नक्सलियों का गढ़ था. अब ‘एजुकेशन सिटी' बनने की ओर बढ़ रहा है. बस स्टैंड, अस्पताल और बेहतर कनेक्टिविटी से यहां नई पहचान बन रही है।   बंद स्कूलों को खोला जा रहा है.

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