छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई के बाद अब सरकार का फोकस बस्तर के विकास पर है. रायपुर में हुए NDTV के "इमर्जिंग छत्तीसगढ़" कॉन्क्लेव में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि बस्तर में नक्सलियों का सशस्त्र नेटवर्क लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है और अब सरकार का लक्ष्य सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश और रोजगार के जरिए इस क्षेत्र को नई पहचान देना है. वहीं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जिन इलाकों में कभी लोग जाने से डरते थे, वहां अब सड़कें बन रही हैं, बसें चल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेज गति से किया जा रहा है.
नक्सलियों का सशस्त्र नेटवर्क लगभग खत्म: विजय शर्मा
विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद का सबसे खतरनाक स्वरूप अब लगभग समाप्त हो चुका है. उनके अनुसार, नक्सलियों का आर्म्ड कैडर खत्म हो गया है और ज्यादातर लोगों ने हथियार छोड़ दिए हैं. उन्होंने बताया कि कुछेक लोग ही अब सक्रिय बताए जाते हैं, जबकि बड़े स्तर पर सशस्त्र गतिविधियों पर नियंत्रण पा लिया गया है.
हालांकि उन्होंने माना कि नक्सलवाद के कुछ आर्थिक और वैचारिक प्रभाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. कुछ स्थानों पर वसूली जैसी गतिविधियों की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन सरकार इनके खिलाफ लगातार अभियान चला रही है.
तेंदूपत्ता व्यवस्था में बदलाव से टूटी आर्थिक कमर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलियों की आर्थिक ताकत कमजोर करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता खरीदी व्यवस्था में बदलाव कर ठेकेदारों की भूमिका कम की गई और खरीद प्रक्रिया को सरकारी तंत्र के माध्यम से संचालित किया गया. उनके मुताबिक, इससे उस आर्थिक स्रोत पर असर पड़ा जिससे नक्सली संगठन को पहले बड़ी रकम मिलती थी. सरकार का दावा है कि इस बदलाव का सीधा असर नक्सलियों के वित्तीय नेटवर्क पर पड़ा है.
अब विकास है सबसे बड़ी प्राथमिकता
विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद पर नियंत्रण के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बस्तर के विकास की है. उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना भी है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बस्तर को देश के सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्रों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में विभिन्न विभाग मिलकर काम कर रहे हैं.
सुरक्षा कैंप बनेंगे 'सेवा डेरा'
विजय शर्मा ने बताया कि जिन सुरक्षा कैंपों की स्थापना नक्सलवाद से मुकाबले के लिए की गई थी, उन्हें अब धीरे-धीरे "सेवा डेरा" में बदला जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे 70 स्थान चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से कुछ जगहों पर काम भी शुरू हो चुका है. इन केंद्रों पर स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र में ही जरूरी सेवाएं मिल सकें.
बस्तर की कनेक्टिविटी सुधारने पर जोर
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद के कारण वर्षों तक बस्तर के कई अंदरूनी इलाकों में सड़क निर्माण नहीं हो पाया. उन्होंने याद दिलाया कि कभी ऐसे राष्ट्रीय राजमार्ग भी थे जो कच्चे रास्तों जैसे थे. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और अन्य योजनाओं के तहत तेजी से सड़कें बनाई जा रही हैं. आने वाले दो से तीन वर्षों में कई दूरस्थ गांवों तक सड़क संपर्क पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
250 से ज्यादा गांव बस सेवा से जुड़े
केदार कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत करीब 70 बसें संचालित की जा रही हैं. इन सेवाओं के जरिए लगभग 250 गांवों को जोड़ने का काम किया गया है. उनके अनुसार, इस योजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों के लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, जो लंबे समय तक मुख्यधारा से कटे रहे. इसके लिए बस ऑपरेटरों को भी सहयोग दिया जा रहा है.
पहली बार रायपुर और एयरपोर्ट देख रहे युवा
मंत्री ने कहा कि बस्तर के कई दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को अब रायपुर और जगदलपुर जैसे शहरों का भ्रमण कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कई ऐसे युवा हैं जिन्होंने पहली बार रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बड़े शहरी संस्थान देखे हैं. सरकार का मानना है कि बाहरी दुनिया से जुड़ाव बढ़ने से युवाओं के भीतर नए अवसरों और करियर के प्रति जागरूकता बढ़ेगी.