Medicine Shortage Mahasamund: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है. जिले के 248 शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले कई महीनों से जीवन रक्षक और सामान्य बीमारियों की दवाइयों की भारी कमी बनी हुई है. हालत यह है कि बीपी, शुगर, सर्दी-खांसी, एंटीबायोटिक, सलाइन और गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी जांच किट तक उपलब्ध नहीं हैं. करीब 14 लाख की आबादी वाले जिले के लाखों मरीज प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग दवाई मिलने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. गरीब मरीजों को 15 से 20 किलोमीटर दूर शहरों से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं.
जिले के 248 स्वास्थ्य केंद्रों में दवाई संकट
महासमुंद जिले में कुल 248 शासकीय स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं.
- 1 जिला अस्पताल
- 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- 209 उप स्वास्थ्य केंद्र
इन स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले तीन से चार महीने से जरूरी दवाइयों की कमी बनी हुई है.
Medicine Shortage Mahasamund: सीएमओ ऑफिस
14 लाख आबादी पर संकट
महासमुंद जिले की लगभग 14 लाख आबादी काफी हद तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है. ग्रामीण क्षेत्रों में निजी अस्पतालों और दवाइयों तक पहुंच सीमित होने के कारण सरकारी अस्पताल ही लोगों का मुख्य सहारा हैं. ऐसे में दवाई संकट ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है.
CGMSC से होती है दवाइयों की आपूर्ति
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) द्वारा की जाती है. NDTV को प्राप्त जानकारी के मुताबिक CGMSC के पास कुल 274 प्रकार की दवाइयों का भंडारण होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में महासमुंद जिले के लिए केवल 193 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध बताई जा रही हैं. इनमें भी कई दवाइयां अभी “ऑर्डर प्रक्रिया” और “क्लीनिकल जांच” में हैं. इसके अलावा 81 प्रकार की दवाइयां पूरी तरह अनुपलब्ध बताई जा रही हैं.
बीपी, शुगर और एंटीबायोटिक तक नहीं
जिले के शासकीय अस्पतालों में जिन दवाइयों की कमी बताई जा रही है, उनमें इस तरह की जरूरी दवाइयां शामिल हैं.
- बीपी की दवाई
- शुगर की दवाई
- सर्दी-खांसी की दवाई
- एंटीबायोटिक
- सलाइन
- चोट की दवाई
- गर्भवती महिलाओं के लिए जांच किट
इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और गरीब मरीजों पर पड़ रहा है.
Medicine Shortage Mahasamund: जन आरोग्य मंदिर गांजर
मरीज बोले- “दवाई नहीं मिल रही”
करीब 90 वर्षीय वृद्धा बिश्वासा ने बताया कि उन्हें बीपी की दवाई नहीं मिली. अस्पताल में कहा गया कि बाद में मिलेगी. वहीं पूर्णिमा धीवर ने कहा कि सर्दी और खांसी की सामान्य दवाई तक उपलब्ध नहीं है. उन्होंने बताया कि अस्पताल में यह भी साफ नहीं बताया जा रहा कि दवाई कब आएगी. हुलास चंद्राकर ने बताया कि उनके पिता पैरालिसिस के मरीज हैं और उन्हें नियमित बीपी की दवा चाहिए. लेकिन दवा नहीं मिलने के कारण उन्हें 16-17 किलोमीटर दूर शहर जाकर दवाई खरीदनी पड़ रही है.
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में खाली स्टॉक
ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी दवाई संकट की पुष्टि की है. रूपेश चक्रधारी, इंचार्ज उप स्वास्थ्य केंद्र देवरी ने बताया कि बीपी, एंटीबायोटिक, चोट की दवाइयां, सलाइन और अन्य कई जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं. आवश्यक डिमांड भेजी गई है, लेकिन सप्लाई नहीं हो पा रही. तुलेश्वरि देवांगन, इंचार्ज उप स्वास्थ्य केंद्र गांजर ने कहा कि फिलहाल केंद्र में दवाइयों की भारी कमी है. जो दवाइयां उपलब्ध हैं, वही मरीजों को दी जा रही हैं. बाकी के लिए लगातार मांग भेजी जा रही है.
Medicine Shortage Mahasamund: देवरी का उप स्वास्थ्य केंद्र
जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सरकारी अस्पतालों में दवाई नहीं मिलने से ग्रामीण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर्स का सहारा लेना पड़ रहा है. गरीब मरीजों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो गई है, क्योंकि उनके पास शहर जाकर महंगी दवाई खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं. कई मरीज इलाज बीच में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. लगातार कई महीनों से जरूरी दवाइयों की कमी रहने के बावजूद व्यवस्था सामान्य क्यों नहीं हो सकी, यह अब बड़ा सवाल बन गया है. यदि समय रहते दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो मौसमी बीमारियों और गंभीर मरीजों की स्थिति और खराब हो सकती है.
जीवन दीप समिति ने माना- लापरवाही हुई
स्वास्थ्य विभाग की जीवन दीप समिति के अध्यक्ष एवं जनपद अध्यक्ष केशव नायकराम चंद्राकर ने भी स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अस्पतालों में दवाई नहीं मिलने से आम जनता परेशान है और इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही जिम्मेदार है.
CMHO की सफाई
महासमुंद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आई. नागेश्वर राव ने कहा कि विभाग द्वारा डिमांड के अनुसार दवाई खरीदी गई है. उन्होंने दावा किया कि जल्द ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाएगी.
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