EVM पर भूपेश बघेल के बयान का असर, राजनांदगांव से अब तक 241 प्रत्याशियों ने लिया नामांकन फॉर्म, अब बैलेट पेपर से होगा चुनाव?

Crowd of Candidates gathered in Rajnandgaon: ईवीएम को लेकर भूपेश बघेल के बयान के बाद राजनांदगांव सीट पर इसका असर देखने को मिल रहा है. यहां नामांकन दाखिल करने के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
महिलाएं नामांकन फॉर्म लेने कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं.

Candidates Nomination in Rajnandgaon Lok Sabha Constituency: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनांदगांव लोकसभा सीट (Rajnandgaon Lok Sabha Seat) इस दिनों चर्चा में है. कारण है कि यहां से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Former CM Bhupesh Baghel) कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि ईवीएम (EVM) से चुनाव नहीं कराए जाने के लिए भूपेश बघेल ने बीते दिनों कई बयान दिए. इस बीच उन्होंने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर (Ballot Paper) से चुनाव कराए जाने के लिए फॉर्मूला भी सुझाया. जिसका समर्थन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी किया था.

दरअसल, पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि यदि किसी सीट से 384 या इससे ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतरते हैं तो ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएंगे. भूपेश बघेल के इस बयान का असर राजनांदगांव सीट पर होता दिख रहा है. नामांकन की प्रक्रिया के दौरान कलेक्टर कार्यालय में निर्दलीय अभ्यर्थियों की भारी भीड़ देखी जा रही है. आज बुधवार को करीब 210 लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नामांकन फॉर्म लिया और आठ अभ्यर्थियों ने नामांकन जमा भी किया.

Advertisement

अब तक 241 नामांकन फॉर्म लिए गए

बता दें कि राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में 26 अप्रैल को दूसरे चरण में चुनाव होना है. इसके लिए 4 अप्रैल को नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है. वहीं भूपेश बघेल के बयान के बाद यहां लगातार निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन पत्र ले रहे हैं. अब तक इस सीट पर कुल 241 नाम निर्देशन पत्र लिए जा चुके हैं. वहीं कल 4 अप्रैल को नाम निर्देशन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि है.

Advertisement

यह भी पढ़ें - PM Modi पर विवादित बयान के बाद चरणदास महंत पर फूटा बीजेपी का गुस्सा, नबीन ने कहा-"...कांग्रेस के मुंह पर तमाचा..."

Advertisement

यह भी पढ़ें - Chhattisgarh Naxal Encounter: बस्तर में नक्सलियों के किले में सुरक्षाबलों ने कैसे लगाया सेंध? जानें इसके पीछे की पूरी कहानी