Khelo India Tribal Games: देश में पहली बार ट्राइबल गेम्स का आयोजन होने जा रहा है और इसकी मेजबानी छत्तीसगढ़ कर रहा है. यह ऐतिहासिक आयोजन देशभर के जनजातीय खिलाड़ियों को एक बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देगा. कुल 3800 खिलाड़ी सात प्रमुख खेलों में मेडल के लिए मुकाबला करेंगे. राज्य सरकार का कहना है कि यह आयोजन न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए, बल्कि पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा कदम है.
जुल्फिकार अली की रिपोर्ट...
ट्राइबल गेम्स का भव्य आगाज
छत्तीसगढ़ में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया जा रहा है. 25 मार्च से 3 मार्च तक चलने वाले इन गेम्स में देश के अलग-अलग हिस्सों से 3800 जनजातीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. इन गेम्स का आयोजन रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर में होगा. खिलाड़ियों की नजर कुल 100 गोल्ड मेडल पर रहेगी.
सात खेलों में खिलाड़ी दिखाएंगे दम
इस आयोजन में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे. वहीं मल्लखंब और कबड्डी का फ्रेंडली प्रदर्शन भी किया जाएगा. जगदलपुर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर में कुश्ती प्रतियोगिताएं होंगी, जबकि बाकी खेलों का आयोजन रायपुर में होगा.
शुभारंभ करेंगे केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री
ट्राइबल गेम्स का उद्घाटन केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मिलकर करेंगे. आयोजन स्थल पर तैयारियों को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को बेहतरीन अनुभव मिल सके.
भारतीय खेल इतिहास में मील का पत्थर- अरुण साव
उप मुख्यमंत्री और खेल मंत्री अरुण साव ने इस आयोजन को भारतीय खेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया. उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे छोटे स्तर के सफल आयोजनों के बाद अब छत्तीसगढ़ एक बड़े मंच की ओर कदम बढ़ा रहा है.
उनके अनुसार, यह आयोजन राज्य के खेल ढांचे को मजबूत करेगा और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का बहुमूल्य अनुभव प्रदान करेगा.
30 राज्यों की भागीदारी, खिलाड़ियों में उत्साह
इस आयोजन में देश के 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं. खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि यह गेम्स पहली बार विशेष रूप से जनजातीय खिलाड़ियों के लिए आयोजित किए जा रहे हैं. आयोजन का उद्देश्य जनजातीय खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है.