Kawasi Lakhma interim bail: छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है. अंतरिम जमानत ED और EOW मामले में दी गई है. हालांकि जमानत के लिए बेल बॉन्ड निचली अदालत तय करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कवासी लखमा अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे.
SC का आदेश- 'अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे लखमा'
आदेश में SC ने कहा कि लखमा छत्तीसगढ़ में तब तक प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक कि उसे कोर्ट में पेश न होना हो और वह कोर्ट की सुनवाई से एक दिन राज्य में आ सकते हैं. आदेश के मुताबिक, कवासी लखमा को स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट नहीं दी जाएगी. आदेश के मुताबिक, कवासी लखमा विदेश यात्रा नहीं करेंगे और पासपोर्ट स्पेशल जज की कोर्ट में जमा करना होगा.
ट्रायल कोर्ट को बताए बिना नहीं बदल सकते लखमा अपना फोन नंबर
कवासी लखमा को अपना फोन नंबर ED अधिकारी को देना होगा और इस नंबर को ट्रायल कोर्ट को बताए बिना बदल नहीं सकते हैं. SC ने कहा कि जांच में काफी समय लगने की संभावना है और जल्दबाजी में ट्रायल का प्रॉसिक्यूशन केस पर बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए जांच पूरी करने के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए. कवासी लखमा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह एक आदिवासी हैं और 6 बार विधायक रह चुके हैं.
कवासी लखमा कब गिरफ्तार हुए थे
बता दें कि 15 जनवरी 2025 को ED और 2 अप्रैल 2025 को EOW ने कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था. इस मामले में कई चार्जशीट फाइल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है. इस केस में 1193 गवाह बनाए गए हैं. कुल 52 आरोपी हैं. वहीं 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें से 19 लोगों को जमानत मिल चुकी है. आरोप लगाया गया कि है कि अपने घर या पार्टी ऑफिस के कंस्ट्रक्शन वगैरह के लिए घूस मिल रहा था. पूरा मामला या तो सेक्शन 161 के बयानों पर आधारित है, जो घरेलू स्टाफ, जिसमें कुक वगैरह शामिल हैं.
वहीं सह-आरोपियों के कबूलनामे के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है. लखमा के वकील ने कहा कि इस मामले में घूस लेने का आरोप है, लेकिन कोई भी बरामदगी नहीं हुई है. कवासी लखमा की उम्र 67 साल हो चुकी है इसलिए जमानत दी जानी चाहिए.
राज्य सरकार और ED ने अंतरिम जमानत का किया विरोध
हालांकि राज्य सरकार और ED की ओर से लखमा की जमानत का विरोध किया गया. राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है. इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है.
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