Chhattisgarh News: अंतिम संस्कार से पहले 4 परिवारों के 14 लोगों की घर वापसी, कांकेर में धर्मांतरण का पर्दाफाश

कांकेर जिले के नरहरपुर क्षेत्र के जामगांव में एक महिला की मौत के बाद चार परिवारों के 14 लोगों ने मूलधर्म में वापसी की. ग्रामीणों और सर्वसमाज की मौजूदगी में सामाजिक रीति-रिवाज के साथ निर्णय लिया गया और दाह संस्कार की तैयारी की गई.

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कांकेर जिले के नरहरपुर क्षेत्र के जामगांव में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है. महिला के अंतिम संस्कार से पहले चार परिवारों के 14 लोगों ने मूलधर्म में वापसी की है. यह निर्णय परिवार ने महिला की मौत के बाद लिया.

सामाजिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार की इच्छा

जानकारी के मुताबिक जामगांव निवासी कमलेश पमार और उनका परिवार कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म अपनाए हुए था. हाल ही में उनकी पत्नी का निधन हो गया. इसके बाद परिवार ने सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार कफन-दफन के बजाय दाह संस्कार करने की इच्छा जताई. इस विषय पर गांव में बैठक आयोजित की गई.

ग्रामीणों और ग्राम प्रमुखों की उपस्थिति में परिवार ने सामाजिक परंपराओं के साथ मूलधर्म स्वीकार करने की प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई.

ग्रामीणों ने किया सहयोग

ग्राम के कंवल नाग ने बताया कि गांव में अन्य समुदायों के कुछ लोगों ने भी पूर्व में धर्म परिवर्तन किया था. कमलेश पमार ने पत्नी के निधन के बाद सर्वसमाज से संपर्क कर समाज में पुन: शामिल होने की बात कही. ग्रामीणों और समाज प्रमुखों की मौजूदगी में उन्हें मूलधर्म में वापस लिया गया. दाह संस्कार के लिए ग्राम स्तर पर लकड़ी की व्यवस्था भी की गई.

ग्राम के वरिष्ठ कमलकिशोर कश्यप के अनुसार पमार परिवार लगभग 4 से 5 वर्ष पहले ईसाई धर्म में गया था. परिवार की ओर से सर्वसमाज, ग्राम के गायता और पटेल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर उन्हें पुन: समाज में शामिल किया गया.

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पहले भी रहा है विवाद

सर्वसमाज प्रमुख ईश्वर कावड़े ने बताया कि जामगांव में शव दफनाने को लेकर पहले भी विवाद की स्थिति बन चुकी है. इस संबंध में पूर्व में बैठक बुलाई गई थी, जिसमें धर्मांतरित लोगों को भी आमंत्रित किया गया था. उस समय वापसी नहीं हुई, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग मूलधर्म में लौट रहे हैं. आवेदन के बाद विधिवत प्रक्रिया के तहत परिवार को वापस स्वीकार किया गया है.

उल्लेखनीय है कि जामगांव लंबे समय से धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर चर्चा में रहा है. यहां शव दफनाने और अन्य सामाजिक विवादों को लेकर पहले भी तनाव की स्थिति सामने आ चुकी है.

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