छत्तीसगढ़ से एक बेहद सुकून देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां कभी बंदूक थामने वाले नक्सली अब मानवता की सेवा में जुटते नजर आ रहे हैं. गरियाबंद जिले का मालगांव इस ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है.
पूर्व नक्सली बने समाजसेवा के प्रेरक
मालगांव में आयोजित रक्तदान शिविर में पूर्व नक्सली कमांडर सुनील और उनके 10 साथियों ने पहुंचकर लोगों का हौसला बढ़ाया. ये वही लोग हैं जो कभी जंगलों में हथियार उठाकर हिंसा का रास्ता अपनाते थे, लेकिन आज समाज की मुख्यधारा में लौटकर सेवा कार्यों में जुट गए हैं.
former naxalites blood donation malgawn chhattisgarh
एक मदद ने बदल दी जिंदगी की दिशा
इस बदलाव के पीछे एक भावुक कहानी है. जब सुनील की पत्नी गंभीर रूप से बीमार थीं और उन्हें खून की जरूरत थी, तब समाजसेवी भीम निषाद ने रक्तदान कर उनकी जान बचाई थी. भीम निषाद की इस निस्वार्थ मदद ने सुनील के जीवन की दिशा ही बदल दी. आज वे उसी रास्ते पर चलकर दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
मालगांव बना ‘रक्तदाताओं का गांव'
मालगांव में आयोजित इस शिविर में 120 से ज्यादा लोगों ने रक्तदान किया. गांव के दिव्यांग निवासी चैंपेश्वर ध्रुव अब तक 21 बार रक्तदान कर चुके हैं और इस बार 22वीं बार रक्त देने पहुंचे. वहीं, एक दुर्घटना में घायल हुए दशपुर के सरपंच नरेंद्र ध्रुव ने भी रक्तदान कर समाज के लिए उदाहरण पेश किया.
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हर साल हजारों की जान बचा रहे भीम निषाद
भीम निषाद पिछले 5-6 वर्षों में 5 हजार से अधिक लोगों के लिए रक्त की व्यवस्था कर चुके हैं. हर साल करीब 1 हजार जरूरतमंदों की जान बचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है. अपने जन्मदिन के मौके पर उन्होंने न सिर्फ रक्तदान शिविर आयोजित किया, बल्कि गांव को एक एंबुलेंस भी दान की, जिससे जरूरतमंदों को मुफ्त सुविधा मिल सके.
नक्सलवाद से मानवता की ओर बड़ा कदम
मालगांव की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां हिंसा की जगह मानवता ने ले ली है. यह घटना बताती है कि सही समय पर की गई एक मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है.