छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध रूप से वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण हटाने गए फॉरेस्ट विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर टकराव हुआ. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी गहमागहमी के साथ हाथापाई और झड़प देखने को मिली. हालांकि, इस पूरे मामले पर अब वन मंडल अधिकारी आलोक वाजपेई ने बयान देते हुए कहा है कि फॉरेस्ट विभाग की टीम पर दबाव बनाने और शासकीय कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जानकारी के मुताबिक पूरा मामला वन परिक्षेत्र रघुनाथ नगर क्षेत्र में आने वाले पंडरी गांव के केनवारी इलाके का बताया जा रहा है. जहां के रहने वाले स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे अवैध रूप से रातों-रात शासकीय वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की. इन लोगों ने इस भूमि पर दुकान के ढांचे, गोमती और खंभे लगाकर झोपड़ी निर्मित कर लिया गया था, जिसका वन विभाग को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिस पर कार्रवाई करने के लिए वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी. जहां अतिक्रमण कर्ताओं ने फॉरेस्ट विभाग की टीम पर दबाव बनाते हुए अभद्रता की गई.
अतिक्रमण हटाने को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध
स्थानीय ग्रामीणों की ओर से सड़क किनारे वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था, जिसकी शिकायत वन अमला को लगातार मिल रही थी. वहीं, इस बार वह मामला अपनी पूरी तैयारी के साथ अतिक्रमण खाली करने के लिए मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट की स्थिति निर्मित हो गई. इस दौरान खूब धक्का मुक्की और दोनों पक्षों के बीच झूमा झटकी भी देखने को मिली. तकरीबन घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही. काफी समय बीत जाने के बाद स्थिति सामान्य हुआ.
ग्रामीण रघुनाथ नगर रेंजर पर लगाए गंभीर आरोप
पूरी घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों ने मौजूदा रघुनाथ नगर वन परिक्षेत्र के रेंजर शिवनाथ ठाकुर के ऊपर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए. इन लोगों ने बताया कि उन्हीं के द्वारा लोगों से पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा कराया जा रहा था. और अब वही कब्जा किए हुए भूमि खाली करने के लिए पहुंचे हैं. लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क किनारे जितनी भी अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया है. यह उन्हीं के द्वारा कराया गया है. उन्हें जितना पैसा दिया जाता था, उसी के हिसाब से जमीन पर कब्जा करने की इजाजत मिलती थी.
डीएफओ ने ग्रामीणों पर कानूनी कार्रवाई का किया ऐलान
इस पूरी घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों ने फॉरेस्ट अमला पर साथ ही रघुनाथ नगर वन परिक्षेत्र की रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर पैसे लेकर कब्जा दिलाने से लेकर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए. वहीं, पूरे मामले पर इन तमाम आरोपों को दरकिनार करते हुए डीएफओ ने ग्रामीणों की बात न सुनकर कहा कि हमारी टीम अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंची थी, जहां उनके ऊपर ग्रामीणों के द्वारा दबाव बनाने की कोशिश की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया. सभी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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बहरहाल, इन तमाम आरोपों पर जांच न कर कर साफ तौर पर ग्रामीणों पर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है, जिससे फॉरेस्ट विभाग की कार्य प्रणाली पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
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