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This Article is From Aug 04, 2025

रायपुर के सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने किया कमाल, एक साथ की कोरोनरी बाईपास और तीन वाल्व की सर्जरी

Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital: डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 58 वर्षीय महिला की एक ही समय में कोरोनरी बाईपास सर्जरी और हृदय के तीनों वॉल्व की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया.

रायपुर के सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने किया कमाल, एक साथ की कोरोनरी बाईपास और तीन वाल्व की सर्जरी

Dr. Bhimrao Ambedkar Hospital Raipur:  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में एक असाधारण चिकित्सा उपलब्धि दर्ज की गई. दरअसल, अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 58 वर्षीय महिला की एक ही समय में कोरोनरी बाईपास सर्जरी और हृदय के तीनों वॉल्व की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया. यह महिला दुर्ग जिले के जेवरा सिरसा गांव की निवासी हैं, जो बीते तीन वर्षों से सांस फूलने और छाती में दर्द की परेशानी से पीड़ित थीं.

95% ब्लॉकेज और तीनों वाल्व थे क्षतिग्रस्त

महिला के स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आया कि उनकी कोरोनरी आर्टरी में 95% ब्लॉकेज है और हृदय के तीनों प्रमुख वाल्व — माइट्रल, एओर्टिक और ट्राइकसपिड — गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं. ईकोकार्डियोग्राफी और कोरोनरी एंजियोग्राफी के बाद विशेषज्ञों ने तुरंत सर्जरी का निर्णय लिया, क्योंकि स्थिति अत्यंत गंभीर थी.

तकनीकी रूप से काफी जटिलता था ऑपरेशन

पहले चरण में डॉक्टरों ने ऑफ पंप बीटिंग हार्ट बाईपास सर्जरी की, जिसमें हृदय की धड़कन बंद किए बिना ही ब्लॉकेज को बाईपास किया गया. इसके बाद हार्ट-लंग मशीन की सहायता से हृदय और फेफड़ों की क्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई.
फिर हृदय के चैम्बर्स को खोलकर माइट्रल वाल्व को मेटालिक कृत्रिम वाल्व से प्रतिस्थापित किया गया. इसके बाद एओर्टिक वाल्व का विशेष तकनीक से रिपेयर किया गया. फिर ट्राइकसपिड वाल्व में रिंग डालकर उसे सुधारा गया.

उच्च जोखिम वाली थी सर्जरी

यह सर्जरी कई मायनों में जोखिमपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी. मरीज की ईजेक्शन फ्रैक्शन (E.F.) काफी कम थी और एक साथ कई जटिल प्रक्रियाएं की गईं. सर्जरी में आर्टेरियल ग्राफ्ट का उपयोग किया गया, जो लंबे समय तक कारगर रहता है. एओर्टिक वाल्व रिपेयर जैसी जटिल प्रक्रिया सिर्फ गिने-चुने अस्पतालों में ही संभव है.

मरीज की हालत स्थिर, जल्द मिलेगी छुट्टी

सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर है और उन्हें शीघ्र ही अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है. यह सफलता हार्ट सर्जरी विभाग के सतत प्रयास, कौशल और समर्पण की वजह से न सिर्फ सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, बल्कि यह सफल भी रहा.

टीम को मिली बधाई

चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस सफलता पर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम को बधाई दी है.  उन्होंने अस्पताल की इस उपलब्धि पर कहा कि यह ऑपरेशन डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के उस सतत प्रयास का प्रतीक है, जिसके जरिए यहां हर दिन जटिल चिकित्सा चुनौतियों को स्वीकार करते हुए मरीजों के जीवन में एक नई उम्मीद लाने का काम किया जाता है. 

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