Dhamtari Nagar Nigam: छत्तीसगढ़ के धमतरी से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक व्यापारी की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की सुस्ती और जवाबदेही की सच्चाई को उजागर करती है. जिस नगर निगम के जिम्मे शहर को संवारने और सुविधाएं देने का दायित्व है, उसी नगर निगम की लेटलतीफी ने एक ईमानदार व्यापारी को आर्थिक बदहाली के कगार पर ला खड़ा किया है. सरकारी गाड़ियों में महीनों तक लाखों का पेट्रोल‑डीजल भरवाने वाला पेट्रोल पंप संचालक आज अपनी कार‑बाइक छोड़ साइकिल चलाने को मजबूर है. बैंक की किस्तें सिर पर हैं, घर चलाना मुश्किल हो गया है और दफ्तर‑दफ्तर भटकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा. यह मामला न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि शहर के अन्य व्यापारियों के लिए भी चिंता का कारण बन गया है.
33 लाख की उधारी, 9 महीने से अटका भुगतान
धमतरी के अंबेडकर चौक स्थित पेट्रोल पंप के संचालक सौरभ नंदा इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन वजह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि उनकी बेबसी है. सौरभ नंदा का आरोप है कि पिछले 9 महीनों तक धमतरी नगर निगम ने उनकी पेट्रोल पंप से बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल लिया. अप्रैल से दिसंबर के बीच नगर निगम पर कुल लगभग 37 लाख रुपये की उधारी बन गई थी. संचालक के मुताबिक, निगम की ओर से अब तक केवल 4 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया है. बाकी 33 लाख रुपये अब भी फाइलों में अटके पड़े हैं. बार‑बार अनुरोध और याद दिलाने के बावजूद भुगतान नहीं हो पा रहा है.
Dhamtari Nagar Nigam: नगर निगम भुगतान विवाद
बैंक से कर्ज लेकर चला रहे पंप, अब किस्तें भी बन रहीं बोझ
सौरभ नंदा बताते हैं कि पेट्रोल पंप का संचालन वे बैंक से कर्ज लेकर कर रहे हैं. नगर निगम की बड़ी रकम फंस जाने के कारण अब बैंक की मासिक किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वे अपनी कार और बाइक में पेट्रोल डलवाने तक की स्थिति में नहीं हैं. आर्थिक तंगी का असर सीधा उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ा है. मजबूरन वे अब साइकिल से नगर निगम और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, ताकि किसी तरह बकाया राशि मिल सके.
“नगर निगम का काम अपना समझकर दिया उधार”
पंप संचालक का कहना है कि उन्होंने नगर निगम के काम को अपना काम समझकर उधारी में तेल दिया था. उन्हें भरोसा था कि सरकारी भुगतान समय पर मिल जाएगा. लेकिन आज वही भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है. उनका आरोप है कि जब भुगतान की बात आती है, तो निगम के अधिकारी और महापौर इसे अपने कार्यकाल का मामला मानने से ही इनकार कर देते हैं. वहीं सौरभ नंदा का दावा है कि सारा ईंधन इन्हीं अधिकारियों के कार्यकाल में लिया गया था.
प्रशासन और राजनीति का खेल?
इस पूरे मामले में राजनीति और जिम्मेदारी से बचने का आरोप भी लग रहा है. पंप संचालक का कहना है कि उन्होंने कमिश्नर से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से ठोस जवाब नहीं मिला. हर जगह सिर्फ आश्वासन मिलते रहे, भुगतान नहीं. नगर निगम की ओर से सफाई दी जा रही है कि बजट की कमी के कारण भुगतान अटका हुआ है और जल्द ही इसे क्लियर कर दिया जाएगा. लेकिन महीनों से “जल्द” का यह वादा पंप संचालक के लिए खोखला साबित हो रहा है.
मजबूरी में नगर निगम को तेल देना बंद
थक‑हारकर अब सौरभ नंदा ने नगर निगम की गाड़ियों को पेट्रोल‑डीजल देना बंद कर दिया है. उनका कहना है कि जब पिछला भुगतान ही नहीं मिल रहा, तो आगे उधारी देना संभव नहीं है. इस फैसले के बाद नगर निगम की सरकारी गाड़ियों की आवाजाही और कामकाज पर भी असर पड़ सकता है, लेकिन पंप संचालक के पास अब कोई और विकल्प नहीं बचा है.
दूसरे व्यापारियों में भी डर
धमतरी नगर निगम के इस रवैये से शहर के अन्य व्यापारियों में भी डर का माहौल है. यदि एक पेट्रोल पंप संचालक के साथ इतना बड़ा भुगतान अटक सकता है, तो छोटे व्यापारियों का क्या हाल होगा? यह सवाल अब हर कोई पूछ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकारी विभागों के भुगतान समय पर नहीं मिले, तो निजी व्यापार कैसे टिक पाएगा?
अब प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी लेटलतीफी का खामियाजा एक ईमानदार टैक्सपेयर और व्यापारी को इसी तरह भुगतना पड़ेगा? यदि जल्द ही 33 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ, तो आशंका है कि यह पेट्रोल पंप हमेशा के लिए बंद हो सकता है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस साइकिल पर आए व्यापारी की सुध कब लेता है और क्या उसे उसका हक समय पर मिल पाता है या नहीं.
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