DGP-IGP Conference Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित डीजीपी–आईजीपी की 60वीं ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अध्यक्षता की. उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने पर जोर दिया. उन्होंने खास तौर पर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फॉरेंसिक विज्ञान, NATGRID जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए आपराधिक कानूनों को समझकर पुलिसिंग को और मजबूत किया जा सकता है. पीएम ने पुलिस नेतृत्व को संदेश दिया कि विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप पुलिसिंग को तेज, भरोसेमंद और जन-केंद्रित बनाना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
तकनीक और AI के व्यापक उपयोग पर जोर
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिसिंग में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और राज्यों को चाहिए कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और NATGRID इंटीग्रेशन का अधिकतम उपयोग करें. उनका मानना है कि इन प्रणालियों को जोड़कर खुफिया जानकारी को और बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे अपराध रोकथाम और जांच दोनों में तेजी लाई जा सकेगी.
नए क्रिमिनल कानूनों को लेकर जागरूकता की अपील
प्रधानमंत्री ने उन नए कानूनों का भी जिक्र किया, जो औपनिवेशिक काल के पुराने नियमों की जगह लागू किए गए हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बारे में लोगों को सरल भाषा में जागरूक करना जरूरी है, ताकि नागरिक भी इन बदलावों को समझ सकें और पुलिसिंग और न्याय प्रणाली के बीच तालमेल बेहतर हो.
युवाओं के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने पर फोकस
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि युवा देश की ताकत हैं और पुलिस विभाग को उनकी सोच के अनुरूप खुद को आधुनिक और संवादशील बनाना होगा. उन्होंने कहा कि पुलिस की पेशेवर, संवेदनशील और उत्तरदायी छवि लोगों का विश्वास बढ़ाती है. इसलिए शहरी पुलिसिंग, टूरिस्ट पुलिसिंग और जनता से संवाद के नए तरीके अपनाने की जरूरत है.
आइलैंड और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के निर्देश
प्रधानमंत्री ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा कि वे निर्जन द्वीपों को भी सुरक्षा ढांचे में शामिल करें. इसके लिए नए मॉडल और बेहतर तकनीक अपनानी चाहिए. तटीय इलाकों में पुलिसिंग को मजबूत करने और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिलाया.
फॉरेंसिक आधारित जांच पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान अब आधुनिक जांच का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है. उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में भी फॉरेंसिक आधारित केस स्टडी कराई जाए, ताकि भविष्य की जांच और मुकदमों में मजबूत सबूत प्रस्तुत किए जा सकें.
आतंकवाद, महिला सुरक्षा और भगोड़ों की ट्रैकिंग पर गंभीर चर्चा
सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात हुई. इसमें विजन 2047 पुलिसिंग रोडमैप, आतंकवाद और कट्टरता के नए रुझान, महिला सुरक्षा में तकनीक का उपयोग, विदेश में छिपे भगोड़ों को वापस लाने की रणनीतियां और फॉरेंसिक क्षमताओं को बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे.
नशा-निरोध और LWE क्षेत्रों के विकास पर प्रधानमंत्री की चेतावनी
प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा-निरोध एक अकेले विभाग का काम नहीं है, बल्कि प्रवर्तन, पुनर्वास और समुदाय—तीनों स्तरों पर मिलकर काम करने से ही इसका समाधान संभव है. वामपंथी उग्रवाद मुक्त क्षेत्रों में विकास को और तेज करने की भी जरूरत बताई गई.
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आपदा प्रबंधन में ‘Whole-of-Government Approach' की जरूरत
चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को लेकर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि तैयारी, समन्वय और तेज प्रतिक्रिया ही जनजीवन को सुरक्षित रख सकती है. उन्होंने हाल में आए चक्रवात Ditwah का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे सरकारी तंत्र को एक साथ मिलकर काम करना होगा.
विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप पुलिसिंग को नया रूप
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने पुलिस नेतृत्व से कहा कि वे विकसित भारत के लक्ष्य के हिसाब से पुलिसिंग के तौर-तरीकों में बदलाव लाएं. तेजी से बदलते दौर में पुलिसिंग को अधिक आधुनिक, प्रभावी और लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाना बेहद जरूरी है.
राष्ट्रपति पुलिस पदक और अर्बन पुलिसिंग अवॉर्ड्स का वितरण
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के कई अधिकारियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए. इसके अलावा, पहली बार शुरू किए गए अर्बन पुलिसिंग अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को सम्मानित किया गया.