Naxal Free bastar: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर (Bastar) में नक्सलवाद (Naxalism) के लगभग खत्म होने के बाद अब क्षेत्र के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अहम पहल होने जा रही है. दरअसल, राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Vishnudev Sai) रविवार देर रात नई दिल्ली (Delhi) पहुंचेंगे, जहां वे शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे. इस दौरे को बस्तर के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 7 अप्रैल को सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. इसके साथ ही वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट करेंगे. इन बैठकों में बस्तर के विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. इस दौरान मुख्यमंत्री साय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के समक्ष बस्तर के विकास का एक व्यापक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करेंगे. इसमें क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक योजनाओं और प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है, जिससे बस्तर को तेजी से विकास की मुख्यधारा में लाया जा सके.
नक्सलवाद के बाद के हालात पर रहेगा फोकस
इस बार की बैठक का मुख्य एजेंडा “पोस्टमाओइस्ट सीनारियो” रहेगा, यानी माओवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद बस्तर के समग्र विकास की दिशा तय करना. दरअसल, सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के बाद अब सरकार का फोकस विकास कार्यों को गति देने पर है.
आधारभूत ढांचे और निवेश पर जोर
प्रस्तुति में बस्तर में सड़कों, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा. इसके साथ ही उद्योगों को बढ़ावा देने और नए निवेश को आकर्षित करने की रणनीति भी साझा की जाएगी.
युवाओं के लिए रोजगार और आदिवासी विकास पर ध्यान
मुख्यमंत्री साय अपनी योजना में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और आदिवासी क्षेत्रों के समावेशी विकास को प्राथमिकता देंगे. इसका उद्देश्य बस्तर के लोगों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है.
विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर को विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए तेजी से काम करना चाहते हैं. यह बैठक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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दिल्ली में होने वाली यह उच्चस्तरीय बैठक बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस रोडमैप के आधार पर आने वाले समय में बस्तर में किस तरह के ठोस बदलाव देखने को मिलते हैं.
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