Cyber Fraud Case: दुर्ग पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो देशभर में म्यूल अकाउंट के जरिए करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहा था. इस गिरोह का मास्टरमाइंड कई राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था और 2 राज्यों के 4 जिलों की पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी. आरोपी लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था. खास बात यह है कि खाते खुलवाने के लिए जरूरी न्यूनतम बैलेंस भी खुद ही देता था. पुलिस ने बालोद जिले के एक गांव से इस गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
म्यूल अकाउंट से चल रहा था देशव्यापी साइबर ठगी रैकेट
दुर्ग पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहा था. आरोपी अब तक 200 से अधिक म्यूल अकाउंट खुलवाकर उन्हें देशभर के ठगों को बेच चुका था. इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन किया गया है.
Cyber Fraud Case: दुर्ग पुलिस का एक्शन, म्यूल अकाउंट का बड़ा नेटवर्क बेनकाब
मास्टरमाइंड बालोद के गांव से गिरफ्तार
पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा को बालोद जिले के गुंडरदेही थाना क्षेत्र के ग्राम तर्राभाठा से गिरफ्तार किया. वह गिरफ्तारी से बचने के लिए यहां छिपकर रह रहा था. मनोज लंबे समय से गाजियाबाद, सूरत, जगदलपुर, रायपुर समेत कई जगहों की पुलिस के रडार पर था.
भिलाई में सौदे के दौरान दबोचे गए आरोपी
24 मई को पुलिस को सूचना मिली कि मनोज अपने साथियों के साथ भिलाई आया हुआ है और म्यूल अकाउंट बेचने की तैयारी में है. सूचना के आधार पर सुपेला पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने संयुक्त कार्रवाई की. सुपेला ओवरब्रिज के पास पांच रास्ता हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर पुलिस ने मनोज भुतड़ा, केवल सेठिया और सत्यनारायण सेठिया को गिरफ्तार कर लिया.
खाता खुलवाने का अलग ही तरीका
जांच में सामने आया कि आरोपी गरीब और सामान्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था. खाते खुलवाने के लिए जरूरी न्यूनतम राशि भी वह खुद ही देता था और बाद में निकाल लेता था. इसके बाद इन खातों को साइबर ठगों को बेच दिया जाता था. साधारण खाता 15 से 20 हजार रुपए में बेचा जाता था जबकि चालू खाता 40 से 50 हजार रुपए में बेचते थे.
खातों पर रखता था नजर, खुद निकालता था पैसा
मनोज की चालाकी यहीं खत्म नहीं होती थी. वह इन खातों के बिक जाने के बाद भी उन पर नजर रखता था. जैसे ही किसी खाते में बड़ा ट्रांजेक्शन होता, वह बैंक से संपर्क कर खाते को होल्ड करवा देता था. बाद में होल्ड हटवाकर वह खुद ही पैसा निकाल लेता था, जिससे ठगी का पैसा दोबारा उसके पास पहुंच जाता था.
बैंकों में साठगांठ का भी खुलासा
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी की कुछ बैंक कर्मचारियों से साठगांठ थी. इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में इतनी बड़ी संख्या में फर्जी खाते खुलवाना संभव हो पाया. पुलिस अब इस एंगल पर भी जांच कर रही है.
आरोपियों से भारी मात्रा में सामान बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से ये मिला.
- 11 बैंक पासबुक
- 7 एटीएम कार्ड
- 3 फिनो पेमेंट किट
- 3 आधार कार्ड
- 1 पैन कार्ड बरामद किए हैं.
यह सभी दस्तावेज म्यूल अकाउंट के नेटवर्क से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं.
2022 से चला रहा था नेटवर्क
पूछताछ में आरोपी मनोज ने कबूल किया कि वह वर्ष 2022 से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था. उसके नेटवर्क में कई राज्यों के लोग जुड़े हुए थे, जो अलग-अलग इलाकों में खाते खुलवाने और उन्हें बेचने का काम करते थे.
पुलिस के लिए बड़ी सफलता
भिलाई CSP सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि दुर्ग पुलिस के लिए यह कार्रवाई बड़ी सफलता मानी जा रही है. इस गिरोह के पकड़े जाने के बाद कई राज्यों में फैले साइबर ठगी नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों, बैंक लिंक और इस नेटवर्क से जुड़े बड़े ठगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
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