सचिन तेंदुलकर का छत्तीसगढ़ दौरा: बच्चों से बोले- ‘बस्तर में हजारों हीरे हैं, हमारी टीम उन्हें तराशेगी’

सचिन तेंदुलकर के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान नक्सल प्रभावित बस्तर में उम्मीद और उत्साह की तस्वीर देखने को मिली. दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव में उन्होंने बच्चों के साथ खेलते हुए कहा कि बस्तर में हजारों हीरे हैं, जिन्हें तराशने की जरूरत है. सचिन ने 100 से अधिक खेल मैदानों के निर्माण में सहयोग का ऐलान किया और खेल व शिक्षा दोनों के महत्व पर जोर दिया.

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Sachin Tendulkar Chhattisgarh Visit: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे बस्तर में बुधवार को उम्मीद, उत्साह और बदलाव की एक बेहद सकारात्मक तस्वीर देखने को मिली. क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव पहुंचे तो माहौल किसी बड़े उत्सव जैसा हो गया. बच्चों के बीच खेलते, मुस्कुराते और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देते सचिन ने साफ संदेश दिया कि बस्तर की धरती प्रतिभाओं से भरी है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की जरूरत है.

इंद्रावती के किनारे गूंजे ‘सचिन-सचिन' के नारे

इंद्रावती नदी के तट पर बसे छोटे से गांव छिंदनार में जैसे ही सचिन तेंदुलकर अपनी फैमिली के साथ पहुंचे, पूरा खेल मैदान तालियों और ‘सचिन-सचिन' के नारों से गूंज उठा. बच्चे अपने आदर्श को अपने बीच देखकर बेहद उत्साहित नजर आए. हर चेहरा खुशी और गर्व से चमक रहा था.

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परिवार और फाउंडेशन की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह

इस खास मौके पर सचिन की बेटी सारा तेंदुलकर, पुत्रवधु सानिया तेंदुलकर और मानदेशी फाउंडेशन की संस्थापक चेतना सिन्हा भी मौजूद रहीं. कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह खेल, ऊर्जा और सकारात्मक सोच से भरा हुआ था.

रस्साकशी और वॉलीबॉल में दिखी खेल भावना

औपचारिक कार्यक्रम से पहले सचिन ने बच्चों के साथ खुलकर समय बिताया. उन्होंने खुद रस्साकशी में हिस्सा लिया. एक टीम में सचिन थे, तो दूसरी टीम में सारा और सानिया नजर आईं. इस मुकाबले में सारा की टीम जीत गई, जिस पर मैदान तालियों से गूंज उठा. इसके बाद सचिन बच्चों के साथ वॉलीबॉल खेलते दिखे और हर पल को एंजॉय किया.

खेल मैदान का निरीक्षण और सहयोगियों का सम्मान

सचिन ने पूरे खेल मैदान का भ्रमण किया और उन लोगों को सम्मानित किया, जिन्होंने इस मैदान के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. जानकारी दी गई कि दंतेवाड़ा जिले में अब तक 25 खेल मैदान तैयार हो चुके हैं और 25 नए मैदानों पर काम जारी है.

100 से ज्यादा खेल मैदानों में सहयोग का ऐलान

मंच से बोलते हुए सचिन तेंदुलकर ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ 50 नहीं, बल्कि 100 से ज्यादा खेल मैदानों के निर्माण में सहयोग देंगे. उन्होंने कहा, “यहां आकर मुझे बहुत खुशी हुई. जब पता चला कि खिलाड़ियों में प्रतिभा है, लेकिन मैदान नहीं, तो मुझे अपना बचपन याद आ गया. मेरी जिंदगी की शुरुआत भी मैदान से ही हुई थी.”

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प्रतिभा को निखारने की कोशिश जारी

सचिन ने मानदेशी फाउंडेशन और सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के काम की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाएं मिलकर यहां बच्चों की खेल प्रतिभा को निखारने का मजबूत प्रयास कर रही हैं. “सही गाइडेंस और कोचिंग बहुत जरूरी होती है, और यहां वही काम किया जा रहा है,” उन्होंने कहा.

शिक्षकों की भूमिका पर दिया जोर

सचिन ने कहा कि शिक्षकों को भी इस तरह प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे बच्चों को खेल की बारीकियां अच्छे से सिखा सकें. उन्होंने कहा, “बस्तर में बहुत सारे डायमंड हैं, उन्हें तराशने की जरूरत है. बच्चों में जो ऊर्जा है, उसे सही दिशा देना बहुत जरूरी है.”

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दोस्ती और जीवन की सीख बच्चों को दी

बच्चों से बात करते हुए सचिन ने पढ़ाई और खेल दोनों को बराबर महत्व देने की बात कही. उन्होंने दोस्ती को समझाते हुए कहा, “एक सच्चा दोस्त दो चीजों जैसा होना चाहिए आईना और परछाई. आईना कभी झूठ नहीं बोलता और परछाई कभी साथ नहीं छोड़ती.”

पिता की सीख ने बदली सोच

अपने बचपन को याद करते हुए सचिन ने अपने पिता की सीख साझा की. उन्होंने कहा, “पिताजी ने कहा था कि क्रिकेट करियर सीमित समय का होता है, लेकिन उसके बाद ऐसा काम करो कि लोग तुम्हें एक अच्छे इंसान के रूप में याद रखें. उसी सोच के साथ मैं हर दिन कुछ अच्छा करने की कोशिश करता हूं.”

बस्तर के भविष्य को नई दिशा
छिंदनार में हुआ यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बस्तर के बच्चों को सपने देखने और उन्हें सच करने का हौसला देने वाला मजबूत संदेश था. सचिन तेंदुलकर की मौजूदगी ने यह भरोसा और मजबूत किया कि बस्तर की पहचान अब सिर्फ संघर्ष नहीं, बल्कि प्रतिभा और सफलता भी बनेगी.