नीलेश त्रिपाठी: छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ‘छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया है. इस फैसले के साथ ही अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों और संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.
रजिस्ट्री सस्ती: 1 करोड़ की संपत्ति पर 60 हजार की बचत
उपकर खत्म होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत कम हो जाएगी. उदाहरण के तौर पर 1 करोड़ रुपये की संपत्ति पर पहले करीब 60 हजार रुपये उपकर देना पड़ता था, जो अब पूरी तरह बच जाएगा. इससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ और किफायती होगी.
सरकार का दावा: जनहित और सरल कर व्यवस्था की दिशा में कदम
मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यह संशोधन सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि जनहित और न्यायपूर्ण कर व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य जनता के जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाना है.
पंजीयन प्रक्रिया में बड़े सुधार
सरकार ने पंजीयन विभाग में कई अहम सुधार भी किए हैं.
- स्वतः नामांतरण व्यवस्था लागू, जिससे रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण
- मई 2025 से अब तक करीब डेढ़ लाख दस्तावेजों का ऑटो म्यूटेशन
- आधार आधारित सत्यापन से फर्जीवाड़े पर रोक
- ‘सुगम' मोबाइल ऐप से संपत्ति की सही लोकेशन सुनिश्चित
स्मार्ट पंजीयन कार्यालय: सुविधाएं भी बढ़ीं
राज्य में पंजीयन कार्यालयों को आधुनिक बनाया जा रहा है. अब नागरिकों को कई जैसी सुविधाएं मिलेंगी.
- वातानुकूलित प्रतीक्षालय
- स्वच्छ पेयजल और शौचालय
- मुफ्त वाई-फाई
- क्यू आधारित त्वरित सेवा
गाइडलाइन वैल्यू से जुड़ेगा शुल्क, बड़ी राहत
पहले पंजीयन शुल्क बाजार मूल्य या गाइडलाइन मूल्य में जो ज्यादा होता था, उस पर लगता था. अब इसे गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है.
उदाहरण के तौर पर, यदि गाइडलाइन मूल्य 10 लाख और दस्तावेज में 25 लाख है, तो शुल्क केवल 10 लाख पर लगेगा. इससे सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है.
परिवारिक रजिस्ट्री अब सिर्फ 500 रुपये में
परिवारजनों के बीच दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर पहले 0.8% शुल्क लगता था. अब इसे घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया गया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो. इससे खासतौर पर किसानों और सामान्य परिवारों को बड़ी राहत मिली है.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए नए नियम
ग्रामीण क्षेत्रों में अब हेक्टेयर के आधार पर मूल्यांकन
- अतिरिक्त मूल्यांकन (जैसे ढाई गुना, वृक्ष आदि) समाप्त
- फ्लैट का मूल्यांकन अब बिल्ट-अप एरिया के आधार पर
- बाउंड्री वॉल और प्लिंथ जैसे अतिरिक्त शुल्क खत्म
- इन सुधारों से जनता को 300-400 करोड़ रुपये तक का लाभ मिलने का अनुमान है.
किसानों के लिए भी राहत
कृषि भूमि पर अतिरिक्त मूल्यांकन जैसे:
- दो फसली भूमि
- नकदी फसल
- तालाब आदि
अब समाप्त कर दिए गए हैं. इससे कृषि भूमि के लेनदेन को सरल और किफायती बनाया गया है.
क्यों हटाया गया उपकर?
सरकार के अनुसार यह उपकर पहले रोजगार मिशन और राजीव गांधी मितान क्लब योजना के लिए लगाया गया था.
अब ये योजनाएं संचालित नहीं हैं और वित्तपोषण सामान्य बजट से हो रहा है, इसलिए उपकर को अप्रासंगिक मानते हुए समाप्त किया गया.
राजस्व का नुकसान, लेकिन जनता को फायदा
वर्ष 2024-25 में उपकर से करीब 148 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं. सरकार ने स्पष्ट किया कि राजस्व का नुकसान होगा, लेकिन इसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह निर्णय आम नागरिकों, किसानों और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए लिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.
क्या होंगे बड़े फायदे?
- संपत्ति रजिस्ट्री सस्ती होगी
- मध्यम और निम्न आय वर्ग को राहत
- पंजीयन में वृद्धि
- आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
- किसानों और परिवारों को सीधा लाभ