छत्तीसगढ़ CRPF कैंप हमला: NIA का बड़ा एक्शन, छह और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर

Chhattisgarh Naxal Attack मामले में NIA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया है. अब इस केस में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है.

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नई द‍िल्‍ली:

छत्तीसगढ़ में साल 2024 में हुए CRPF शिविर हमले के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को 6 और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया है. इनमें तीन आरोपी फरार बताए जा रहे हैं.

जांच एजेंसी के अनुसार, यह हमला प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के सदस्यों द्वारा सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था. इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक नामजद आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है.

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धर्मवरम कैंप पर हुआ था बड़ा हमला

NIA के बयान के मुताबिक, माओवादियों ने बीजापुर जिले के धर्मवरम स्थित CRPF शिविर को निशाना बनाया था. हमलावर स्वचालित हथियारों और स्वदेशी रूप से तैयार बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) से लैस थे.

इस हमले में CRPF के 12 जवान घायल हो गए थे. खास बात यह रही कि यह कैंप हाल ही में स्थापित किया गया था, जिससे साफ होता है कि माओवादियों ने नई सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई थी.

एक साथ तीन कैंपों पर हमला

जांच में यह भी सामने आया है कि 16 जनवरी 2024 को माओवादियों ने एक साथ तीन अलग-अलग स्थानों पर हमला किया था. धर्मवरम के अलावा चिन्तावागु और पामेड स्थित CRPF शिविरों को भी निशाना बनाया गया. इस तरह के समन्वित हमले से सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी और पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी करना पड़ा था.

गिरफ्तार और फरार आरोपी

NIA ने जिन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है, उनमें गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी शामिल हैं. 

  • अवलम भीमा
  • मदकम नंदा
  • मदकम देवा उर्फ रतन

वहीं, संगठन की स्पेशल जोनल कमेटी (SZC) का एक सदस्य अभी भी फरार है. अन्य आरोपियों के बारे में एजेंसी ने फिलहाल विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है.

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पहले भी दाखिल हो चुका है आरोपपत्र

इससे पहले NIA ने जून 2024 में 17 माओवादियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. ताजा पूरक चार्जशीट के बाद अब जांच और मजबूत मानी जा रही है.

सुरक्षा एजेंसियां इस हमले को नक्सलियों की बड़ी साजिश के रूप में देख रही हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बलों के मनोबल को कमजोर करना था. हालांकि, लगातार कार्रवाई से यह साफ है कि एजेंसियां इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं.

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