छत्तीसगढ़ के बोरपाल में शव दफनाने पर विवाद, परिवार की ‘घर वापसी’ के बाद गांव में लौटी शांति

नारायणपुर के बोरपाल गांव में शव दफनाने को लेकर उपजा विवाद परिवार की घर वापसी के बाद खत्म हो गया. परिवार ने मूल आदिवासी धर्म और रीति-रिवाजों के पालन पर सहमति दी, जिसके बाद गांव में शांति बहाल हो गई.

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के ग्राम बोरपाल में बीते कुछ दिनों से चल रहा मतांतरण और शव दफनाने से जुड़ा विवाद अब सुलझ गया है. एक मतांतरित परिवार द्वारा बुजुर्ग की मृत्यु के बाद ईसाई रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किए जाने पर ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया था.

स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों से बातचीत की गई. इसके बाद पीड़ित परिवार ने मूल आदिवासी धर्म में वापसी (घर वापसी) का निर्णय लिया. परिवार ने लिखित रूप से आदिवासी रीति-नीतियों का पालन करने की सहमति दी, जिसके बाद गांव में शांति बहाल हो गई. 

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Chhattisgarh Burial Dispute in Borpal Resolved

जानकारी के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को गांव निवासी बिरसिंह के पिता का निधन हुआ था. बिरसिंह अपने पिता का अंतिम संस्कार ईसाई मिशनरी परंपरा से करना चाहता था, लेकिन गांव के आदिवासी समाज ने इसका विरोध किया. ग्रामीणों का कहना था कि यह क्षेत्र 5वीं अनुसूची में आता है और यहां आदिवासी समाज की परंपराओं व स्वायत्तता का पालन अनिवार्य है.

विवाद बढ़ने पर मौके पर डीएसपी स्तर के अधिकारी सुदर्शन ध्रुव सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया. आखिरकार सामाजिक समझाइश और गांव के दबाव के बाद बिरसिंह और उसके परिवार ने मूल धर्म में लौटने का फैसला किया. गांव के गायता पटेल और मांझी पुजारी की उपस्थिति में ग्राम देवताओं के मंदिर में विशेष विधान संपन्न कराया गया. 

Chhattisgarh Burial Dispute in Borpal Resolved

परिवार ने लिखित और मौखिक रूप से यह स्वीकार किया कि वे भविष्य में आदिवासी रूढ़ि-प्रथा और परंपराओं का ही पालन करेंगे. बिरसिंह ने बताया कि वह प्रार्थना सभाओं से प्रभावित होकर ईसाई धर्म की ओर गया था, लेकिन अब गांव के आह्वान पर उसने सपरिवार मूल धर्म अपना लिया है.

इस घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े मंगाऊ राम कावड़े ने इसे परिवार का साहसिक निर्णय बताया. वहीं, सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के अध्यक्ष गुलाब बघेल ने भी परिवार के फैसले का स्वागत करते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की. फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है और अंतिम संस्कार आदिवासी रीति-रिवाज से संपन्न कराने पर सहमति बन गई है.

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