Chhattisgarh assembly election 2023 : टिकट बांटने में बीजेपी ने मारी बाजी, जानिए कांग्रेस क्यों कर रही है देरी?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (chhattisgarh assembly election 2023) जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं. वैसे-वैसे बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) समेत तमाम पॉलिटिकल पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी है. जहां एक ओर बीजेपी तरफ से 21 प्रत्याशियों (BJP candidates list) की पहली लिस्ट आ चुकी है, वहीं कांग्रेस में टिकट को लेकर मंथन जारी है. जानिए क्या है वजह?

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रायपुर:

Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (chhattisgarh assembly election 2023) जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं. वैसे-वैसे बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) समेत तमाम पॉलिटिकल पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी है. जहां एक ओर बीजेपी की तरफ से 21 प्रत्याशियों (BJP candidates list) की पहली लिस्ट आ चुकी है, वहीं कांग्रेस में टिकट को लेकर अभी भी मंथन जारी है.

क्या इस वजह से कांग्रेस कर रही है देरी?

ऐसी चर्चा है कि कांग्रेस के अंदरुनी सर्वे (congress survey) में जो परिणाम आया है, उसके अनुसार पार्टी के 30 से ज्यादा विधायक हार सकते हैं. इसलिए कांग्रेस मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का जोखिम उठाने की बजाय टिकट वितरण में देरी कर रही है. ऐसी खबर है कि कांग्रेस पार्टी इस बात को लेकर मंथन कर रही है कि आचार संहिता लगने के बाद  बाद टिकटों की घोषिणा की जाए तकि मौजूदा विधायकों की नाराजगी का ज्यादा नुकसान पार्टी को ना उठाने पड़े. 

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15 चुनाव में 10 बार कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में मिला पूर्ण बहुमत

छत्तीसगढ़ 1952 से लेकर 2000 तक अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा रहा है, उस दौरान हुए 10 चुनाव में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ से ज्यादा सीटें मिलने की वजह से सरकार बनती रही हैं. 2003 से 2018 तक प्रदेश में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर 68 सीट जीत सरकार बनाई है 

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कांग्रेस के टिकट वितरण का ट्रेंड 

अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से छत्तीसगढ़ कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन 2003 से 2018 के बीच बहुत कम अंतर से बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की थी. अब तक कांग्रेस सिटिंग विधायकों की टिकट काटने में गुरेज नहीं करती रही है. एक अध्ययन से यह बात साफ होती है कि कांग्रेस 1952 से अब तक हुए चुनाव में कई बार आधे से ज्यादा विधायकों की टिकट काट चुकी है, हालांकि पार्टी को अपने इन फैसलों का फायदा और नुकसान दोनों उठाना पड़ा है.

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अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में 1952 के चुनाव में 82 सीटों में से 73 पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जिसमें 57 जीत कर आये और सरकार बनाने में छत्तीसगढ़ की अहम भूमिका रही.

अगले चुनाव 1957 में हुए जिसमें छत्तीसगढ़ में 82 की जगह 81 सीट हो गईं कांग्रेस ने उस समय 57 विधायकों में 29 विधायकों की टिकट काट दी थी जबकि 28 पुराने विधायकों में 22 जीत कर आये और 6 हार गए. इस चुनाव में कांग्रेस ने 68 सीटें जीती थी.

1962 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 68 विधायकों में से 50 विधायकों की टिकट काट दी इस बार कांग्रेस ने 48 सीट छत्तीसगढ़ क्षेत्र से जीती थी.

1967 के चुनाव में 48 सीट में कांग्रेस ने 31 विधायकों की टिकट काट दी थी, इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की 81 सीट से बढ़कर 84 हो गई थी जिसमें कांग्रेस ने 59 सीटें जीती थीं.

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1972 के चुनाव में 59 सीट में 28 विधायकों की टिकट कांग्रेस ने काट दी थी, इस चुनाव में कांगेस ने 64 सीट जीती. 1977 में पार्टी ने 38 सीटों के टिकट काट दिए थे फिर भी कांग्रेस को 39 सीट मिली थीं. 1993 से लेकर 2018 तक के चुनाव में कांग्रेस ने सिटिंग विधायकों की कम टिकट काटी 2018 में सिर्फ 8 टिकट काटी थी और कांग्रेस ने 68 सीट में जीत दर्ज की थी.

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