10वीं बोर्ड रिजल्ट से पहले गरियाबंद में साइबर ठग सक्रिय, पास कराने के नाम पर परिजनों को ऐसे बना रहे निशाना

CGBSE Chhattisgarh Board 10th Result 2026: गरियाबंद में 10वीं बोर्ड रिजल्ट से पहले साइबर ठग सक्रिय. पास कराने के नाम पर फोन कॉल, APK और QR कोड भेजकर ठगी की कोशिश. पढ़िए पूरी खबर.

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10वीं बोर्ड रिजल्ट से पहले गरियाबंद में साइबर ठगी को लेकर पुलिस अलर्ट

CGBSE 10th Board Results: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं. गरियाबंद जिले में ठगों ने पालकों और छात्रों को निशाना बनाकर ठगी का नया तरीका अपनाया है. खुद को बोर्ड या शिक्षा विभाग का अधिकारी बताकर फोन कॉल किए जा रहे हैं और बच्चों को फेल होने का डर दिखाकर पास कराने के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं. इस तरह की घटनाओं ने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि डिजिटल ठगी के बढ़ते खतरे को भी उजागर कर दिया है.

फिंगेश्वर क्षेत्र से सामने आया मामला

गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र से सामने आए इस मामले ने अभिभावकों को सतर्क कर दिया है. यहां निवासी चेतन निर्मलकर को पिछले कुछ दिनों से लगातार अज्ञात नंबरों से फोन कॉल आ रहे थे. फोन करने वाला व्यक्ति बड़े आत्मविश्वास के साथ खुद को बोर्ड ऑफिस का वरिष्ठ अधिकारी बता रहा था. शुरुआत में उसने रिजल्ट को लेकर सामान्य बातचीत की, फिर अचानक यह कहकर डराया कि चेतन की बेटी 10वीं बोर्ड परीक्षा में दो विषयों में फेल हो गई है.

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CGBSE10th Board Results: गरियाबंद साइबर फ्रॉड

पास कराने के नाम पर पैसों की मांग

कॉल करने वाले ठग ने इसके बाद सहानुभूति का नाटक करते हुए कहा कि यदि कुछ “प्रोसेसिंग चार्ज” दे दिए जाएं, तो कंप्यूटर सिस्टम में सुधार कर बच्ची को पास कराया जा सकता है. इसके बदले 2500 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की मांग की गई. ठग ने यह भी दावा किया कि वह अंदर से सब संभाल लेगा और रिजल्ट आने पर बच्ची पास दिखाई देगी. डर और तनाव में आए कई अभिभावक ऐसी बातों में फंस सकते हैं.

हाईटेक तरीके से की जा रही ठगी

यह ठगी सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं है. चेतन निर्मलकर ने बताया कि बातचीत के बाद ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए संदिग्ध APK फाइलें, QR कोड और कुछ फोटो भी भेजे. साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी APK फाइलें दरअसल खतरनाक मालवेयर होती हैं. इन्हें मोबाइल में इंस्टॉल करते ही फोन का पूरा नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता है. इसके बाद बैंक खातों, ओटीपी, पासवर्ड और निजी डेटा तक खतरा पैदा हो जाता है.

मानसिक दबाव का उठा रहे फायदा

रिजल्ट से पहले छात्र और उनके परिजन मानसिक तनाव में रहते हैं. साइबर ठग इसी कमजोरी को अपना हथियार बनाते हैं. “फेल” शब्द सुनते ही कई अभिभावक घबरा जाते हैं और बिना जांच-पड़ताल के ठगों की बातों में आ सकते हैं. यही वजह है कि ऐसे मामलों में जागरूकता बेहद जरूरी हो जाती है.

पुलिस ने जारी की सतर्कता सलाह

मामले की जानकारी मिलते ही फिंगेश्वर पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल या किसी भी सरकारी बोर्ड में फोन कॉल के जरिए पैसे लेकर किसी छात्र को पास कराने का कोई प्रावधान नहीं है. रिजल्ट की पूरी प्रक्रिया गोपनीय और कंप्यूटराइज्ड होती है, जिसमें किसी व्यक्ति के स्तर पर बदलाव संभव नहीं है.

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किसी लिंक या QR कोड से रहें दूर

पुलिस ने अभिभावकों और छात्रों को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें. अनजान लिंक पर क्लिक करना, QR कोड स्कैन करना या APK फाइल डाउनलोड करना भारी आर्थिक नुकसान और डेटा चोरी का कारण बन सकता है. यदि ऐसी कोई कॉल या मैसेज आता है, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराएं.

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता है. रिजल्ट चाहे जैसा भी हो, आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और किसी भी तरह के लालच या डर में आकर पैसे न दें. सही जानकारी और सतर्कता ही छात्रों और अभिभावकों को ऐसे ठगों से सुरक्षित रख सकती है.

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