छत्तीसगढ़ में है 500 वर्ष पुराना भूफोड़ हनुमान मंदिर, जानिए क्यों कहलाते हैं चमत्कारी भगवान

Hanuman Jayanri 2024: बताया जाता है कि 400 वर्ष पूर्व इस गांव के आसपास काफी सूखा रहता था. जहां लोग काफी परेशान थे. एक दिन जब एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था तभी जमीन में उसका हल फस गया. काफी मशक्कत के बाद जब हल को निकाला गया तब उसमे जमीन के नीचे हनुमान जी की मूर्ति थी.

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Hanuman Jayanti 2024: आज हनुमान जयंती का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर ग्राम कमरौद में स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती धूमधाम से मनाया गया. दरअसल यहां स्थापित भगवान हनुमान की मूर्ति (Balod Hanuman Mandir) वर्षों पुरानी है. इस मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर कई तरह के किवदंती हैं. हालांकि इनके यहां विराजमान होने के समय की आधिकारिक जामकारी किसी के पास नहीं है. कोई 50 साल तो कोई 500 साल पुरानी मूर्ति बनाते नजर आते है. 72 वर्षीय बुजुर्ग के अनुसार उनके परदादा के समय से भी पहले की प्रतिमा बताई जाती है. इस लिहाज से इस चमत्कारी प्रतिमा का उद्गम 500 वर्षो से भी पुरानी मानी जा रही है और इसे लोग चमत्कारी हनुमान (Chamatkari Hanuman ji) भी कहते है. 

ऐसे मिली थी मूर्ति

दूर दराज से लोग यहां अपनी मनोकामना लेकर आते है. इस मूर्ति की प्रसिद्धि अब जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में भी होने लगी है. वही हनुमान जयंती पर भव्य कार्यक्रम, हवन, विशाल भंडारा, भी होता है. इस मूर्ति के मिलने के पीछे एक कहानी है. रामचरित मानस में उल्लेखित है कि श्रीराम ने हनुमान जी को चिरकाल तक जीवित रहने का आशीर्वाद दिया. जहा माना जाता है कि आज भी भगवान हनुमान जीवित है. कुछ ऐसे ही कहानी बालोद जिले के ग्राम कमरौद के मंदिर में स्थित हनुमान जी की प्रतिमा की है. बताया जाता है कि 400 वर्ष पूर्व इस गांव के आसपास काफी सूखा रहता था. जहां लोग काफी परेशान थे. एक दिन जब एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था तभी जमीन में उसका हल फस गया. काफी मशक्कत के बाद जब हल को निकाला गया तब उसमे जमीन के नीचे हनुमान जी की मूर्ति थी. उस मूर्ति की पूरी मिट्टी साफ कर उसे वही स्थापित किया गया. तब से ये भूफोड़ हनुमान जी के नाम से जाने जाते है.

भूफोड़ हनुमान जी की मूर्ति अपने आप होने लगी बड़ी

जिसके लिए छोटा सा मंदिर भी बनाया गया. मगर मूर्ति धीरे धीरे बढ़ने लगी. जिससे मंदिर का छत टूट जाता था. ऐसा 3-4  बार हुआ. जहां मूर्ति लगातार बढ़ती गई और अब ये मूर्ति 12 फीट की हो गई है, बताया जाता है की जब मूर्ति मिली तो वो सिर्फ 2 फीट की थी जो धीरे धीरे बढ़ती गई. जहां मूर्ति मिली वहां लोगों एवं दानदाताओं के सहयोग से एक भव्य मंदिर बनाया गया. जिसकी छत की ऊंचाई 28 फीट की गई, जहां धीरे धीरे लोगो की आस्था इस मंदिर के प्रति बढ़ रही है.

शिवलिंग और काली माता भी है स्थापित

अब इस मंदिर को चमत्कारी हनुमान मंदिर भी कहते है.. जहा बड़ी दूर दूर से लोग इस जगह पर मनोकामना लेकर आते है.. ऐसा माना जाता है की इस मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है..जहां इस मन्दिर के प्रति लोगो की आस्था दिनों दिन बढ़ रही है, वही मंदिर के प्रांगण में भव्य शिव लिंग बना हुआ है. तो बाहरी भाग में एक तरफ शनि देव जी स्थापित है तो दूसरी तरफ माँ काली की भव्य विशाल मूर्ति है. जिसे देखते ही नजरें नही हटती हैं.

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श्रद्धालुओं के लिए है पूरी व्यवस्था

दूर दराज से आये श्रद्धालुओं के लिए पानी बैठक व्यवस्था, सुंदर गार्डन भी बनाया गया है. मंदिर परिसर में बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं. महाशिवरात्रि को यहां मेला भी लगाया जाता है. क्वार और चैत्र नवरात्रि भी मनाई जाती हैं.

ऐसी है मान्यता

मंदिर के पुरोहित वेंकटा प्रसाद मिश्रा की माने तो पहले यहां एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था. चेतन दास बैरागी यहां पूजा पाठ करते थे. क्वार और चैत्र नवरात्रि में भी काफी धूम होती है. मंदिर के कोषाध्यक्ष विशम्भर राम चतुर्वेदी की माने तो आज हनुमान जयंती पर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मन्नत अवश्य पूरी होती हैं इसलिए बहुत बहुत दूर दूर तक भक्त यहां आते हैं.. विशम्भर बताते है कि अगर दूर दराज से आने वाले लोगों को गांव का नाम मालूम नहीं है, तो किसी से भी पूछे कि बजरंग बली के मंदिर वाला गांव जाना है, इस तरह कोई भी यहां पहुचा देता हैं. आज हनुमान जयंती पर दिनभर भंडारा खुला रहेगा. प्रसाद के रूप में खीर पूड़ी बटेंगे और पूजा पाठ किया जाएगा. 

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