Durg: अवैध प्लॉटिंग करने पर बीजेपी नेता समेत चार भू-माफियाओं पर केस दर्ज, नगर निगम के निर्देश पर हुई कार्रवाई

CG News: दुर्ग में अवैध प्लॉटिंग करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है. आरोपियों में बीजेपी नेता भी शामिल है.

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पुलिस ने एक बीजेपी नेता समेत चार भू-माफियाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है.

Action Against Illegal Plotting in Durg: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग (Durg) में अवैध कब्जे और प्लॉटिंग को लेकर नगर निगम (Municipal Corporation Durg) सख्त नजर आ रहा है. निगम ने इसके लिए भूमाफियाओं पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है. भिलाई नगर निगम कमिश्नर देवेश कुमार ध्रुव (Bhilai Municipal Corporation Commissioner) के निर्देश पर जामुल पुलिस ने अवैध प्लाटिंग करने वाले भाजपा नेता और भूमाफिया प्रदीप गुप्ता सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इन भूमाफिया पर कुरुद गांव में अवैध प्लाटिंग का आरोप है. निगम ने इनके अवैध प्लाट से मुरुम भी जब्त किया है. नगर निगम आयुक्त की तरफ से निगम के सफाईकर्मी गेदलाल देवांगन ने यह मामला दर्ज कराया है.  

जामुल पुलिस (Durg Police) से मिली जानकारी के अनुसार, भिलाई नगर निगम के सफाई कर्मी गेदलाल देवांगन ने 21 जून को एक शिकायत पत्र दिया था. यह शिकायत पत्र नगर पालिका निगम भिलाई के आयुक्त ने लिखा था, जिनके आवेदन के आधार पर पुलिस ने अवैध प्लांटिंग करने वाले पारस, संदीप गुप्ता, श्रीराम बरण गुप्ता और प्रदीप गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है. संदीप और प्रदीप गुप्ता दोनों भाई हैं और श्रीराम बरण गुप्ता उनके पिता हैं.

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अवैध प्लॉटिंग करते पाए गए आरोपी

भिलाई निगम के आयुक्त ने अपने पत्र में लिखा कि निगम क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुरूद के खसरा नंबर 1546 की जमीन पर चार लोग अवैध प्लाटिंग करते पाए गए हैं. यह जमीन शहर के बीच लोहिया रोड के पीछे कैलाश नगर भिलाई के पास स्थित है. चारों आरोपियों ने प्लाटिंग के लिए न तो नगर पालिका निगम भिलाई (कालोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण) कराया है और न ही संबंधित भू स्वामियों को कालोनाईजर लाइसेंस जारी किया गया है.

इतने साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान

नगर पालिका निगम के आयुक्त ने पुलिस को दिए आवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अवैध प्लाटिंग का कार्य जो कि प्रदीप गुप्ता और अन्य के द्वारा किया गया है. वह छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 292(ग) का उल्लंघन है. ऐसा करने वाले के खिलाफ कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक सात साल की कारावास की सजा हो सकती है. इसके साथ ही आरोपी पर कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा.

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