विधायक पोर्ते के फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला, सत्यापन समिति ने बढ़ाई सुनवाई की तारीख

प्रतापपुर भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में सुनवाई एक बार फिर टल गई है. बलरामपुर में जिला स्तरीय छानबीन/सत्यापन समिति के सामने दोनों पक्षों की दलीलों के बाद भी कोई निर्णय नहीं हो पाया.

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BJP MLA controversy Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का विषय बने प्रतापपुर भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में एक बार फिर फैसला टल गया. बलरामपुर जिले में इस प्रकरण की सुनवाई चल रही है, लेकिन अंतिम तर्कों पर बहस के बावजूद कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया. नतीजतन, जिला स्तरीय छानबीन/सत्यापन समिति ने अगली सुनवाई की तारीख 19 फरवरी तय कर दी है. लगातार तारीखें बढ़ने से इस मामले पर सवाल भी उठ रहे हैं और विरोध भी तेज होता दिख रहा है.

गुरुवार को बलरामपुर जिले में चल रही सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष जिला अपर न्यायालय/समिति के समक्ष उपस्थित रहे. सुबह से अंतिम तर्कों पर बहस हुई और लंबे समय तक दलीलें रखी गईं, लेकिन प्रकरण पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया. इसके बाद समिति ने अगली तारीख 19 फरवरी तय करते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी.

मामला क्या है, हाईकोर्ट तक क्यों पहुंचा?

यह प्रकरण प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, धन सिंह धुर्वे और जय सिंह पुसाम ने इस मामले को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने जिला स्तरीय सत्यापन/जांच समिति को जांच करके प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा पूरी हो जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया जारी बताई जा रही है, इसलिए फैसला अभी तक नहीं हो सका है.

बार-बार तारीख बढ़ने पर बढ़ी नाराजगी

प्रकरण में लगातार देरी को लेकर सर्व आदिवासी समाज के लोगों में नाराजगी सामने आती रही है. बताया गया है कि वे समिति के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं. पहले भी सुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन का असर दिखा था और मुख्य सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई थी, जिससे प्रशासन की चुनौती बढ़ी थी.

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विधायक के विरोधी पक्ष की दलील क्या है?

विधायक के विरोधी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि समिति ने दोनों पक्षों को सुना है और नियम के अनुसार 30 दिनों के भीतर निर्णय होना चाहिए, अनावश्यक रूप से मामले को लंबित नहीं रखना चाहिए. उन्होंने यह भी तर्क रखा कि जाति प्रमाण पत्र माता-पिता के आधार पर बनता है, पति के आधार पर नहीं. उनके मुताबिक, विधायक का प्रमाण पत्र पति के आधार पर बनाया गया है, जो नियम के विपरीत माना जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा मान लिया जाए, तो कोई भी व्यक्ति अंतरजातीय विवाह के जरिए आरक्षण का लाभ लेने का रास्ता तलाश सकता है जो गलत परंपरा बन सकती है.

सुनवाई के दिन प्रशासन ने क्यों बढ़ाई सुरक्षा?

पिछली सुनवाइयों के अनुभव को देखते हुए इस बार जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग लगाई गई. परिसर में पुलिस बल की तैनाती भी बड़े पैमाने पर की गई. बताया गया कि प्रवेश केवल अधिकृत लोगों और पक्षकारों को ही दिया गया, ताकि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे.

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विधायक पक्ष की दलील क्या है?  

विधायक पक्ष के अधिवक्ता उदय प्रकाश सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में रीट याचिका के जरिए प्रमाण पत्र को फर्जी बताया और समिति पर सुनवाई में देरी का आरोप लगाया था, जिस पर अदालत ने जल्द सुनवाई के निर्देश दिए थे. उन्होंने यह भी कहा कि प्रकरण में कानूनी बाध्यता उत्पन्न हुई है, इसे लेकर समिति के सामने आपत्ति दर्ज कराई गई है.

अधिवक्ता सिंह ने अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के निर्वाचन को चुनौती देने का उचित रास्ता केवल इलेक्शन पिटिशन है, रीट याचिका के जरिए नहीं. उन्होंने समिति से आग्रह किया कि जाति प्रमाण पत्र सत्यापन प्रकरण को समाप्त किया जाए. 

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