बलौदा बाजार के किसानों-व्यापारियों को बड़ी सौगात, भाटापारा की मंडी जल्द होगी शिफ्ट, शहर को जाम से मिलेगी मुक्ति

Baloda Bazar: छत्तीसगढ़ का हृदय कहे जाने वाले भाटापारा शहर को वर्षों पुरानी समस्या- जाम से आखिरकार निजात मिलने वाली है. शहर के बीचों-बीच 1958 में स्थापित पुरानी कृषि उपज मंडी अब इतिहास बनने जा रही है. यहां होने वाली खरीदी बिक्री को अब शहर से बाहर शिफ्ट किए जाने की तैयारी है.

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Bhatapara Agricultural Produce Market Shift: छत्तीसगढ़ का औद्योगिक और कृषि केंद्र कहलाने वाला भाटापारा, जल्द ही अपनी पहचान को नई दिशा देने जा रहा है. दरअसल, 1958 में शहर के बीचोंबीच स्थापित कृषि उपज मंडी अब शहर से बाहर शिफ्ट होने जा रही है. मार्च 2026 तक 35 एकड़ में बन रही यह नई मंडी पूरी तरह तैयार हो जाएगी. प्रशासन का दावा है कि यहां किसानों, व्यापारियों और हमालों के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे.

 भाटापारा स्थित कृषि उपज मंडी कब शहर से बाहर होगी शिफ्ट?

छत्तीसगढ़ का हृदय कहे जाने वाले भाटापारा शहर को वर्षों पुरानी समस्या- जाम से आखिरकार निजात मिलने वाली है. शहर के बीचों-बीच 1958 में स्थापित पुरानी कृषि उपज मंडी अब इतिहास बनने जा रही है. यहां होने वाली खरीदी बिक्री को अब शहर से बाहर शिफ्ट किए जाने की तैयारी है. प्रशासन ने नई मंडी परिसर का निर्माण कार्य तेज कर दिया है और दावा है कि मार्च 2026 तक इसे शहर से बाहर स्थानांतरित कर मंडी पूरी तरह से किसानों और व्यापारियों को के लिए खोल दी जाएगी.

 भाटापारा में बड़े पैमाने पर स्थापित है फूड प्रोसेसिंग उद्योग

हावड़ा-मुंबई रेलवे लाइन के बीच बसे भाटापारा शहर का इतिहास उतना ही पुराना है जितना इस रेल लाइन की. यहां 1958 के पहले से मीलों का संचालन किया जा रहा है. आज यह संख्या 1000 के पार हो चुकी है. शहर और आसपास के इलाकों में करीब 1 हजार से अधिक मिलें हैं, जिनमें प्रमुख रूप से पोहा और राइस मिलें शामिल हैं. यही नहीं, यहां फूड प्रोसेसिंग उद्योग भी बड़े पैमाने पर स्थापित हैं. यही वजह है कि बलौदा बाजार जिले से लगे कम से कम 6 जिलों के किसान अपनी फसल बेचने भाटापारा मंडी पहुंचते हैं.

56 करोड़ की लागत से नई मंडी परिसर होगा निर्माण

1958 की शुरुआत में जब भाटापारा शहर के बीच मंडी परिसर का निर्माण किया गया तब इसका क्षेत्रफल 20 एकड़ का था, लेकिन समय के साथ शहर बढ़ता गया और मंडी परिसर सिमटता गया. हालात आज यह हैं कि मंडी परिसर अब महज 9 एकड़ क्षेत्रफल में सिमट चुकी है, जहां अतिक्रमण की समस्या भी है. इसी मंडी में बड़ी संख्या में किसान आते हैं तो पूरे शहर में जाम की स्थिति बन जाती है. बरसात के दिनों में शेड की कमी के कारण किसानों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं. उनकी फसल कभी भींग जाती है तो कभी कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है. यही कारण है कि नई मंडी की मांग लंबे समय से उठ रही थी.

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इन मांगों को देखते हुए भाटापारा शहर से बाहर नई मंडी परिसर का निर्माण 56 करोड़ की लागत से लगभग 35 एकड़ क्षेत्रफल पर किया जा रहा है. इस परिसर को अतिक्रमण से बचाने के लिए पहले ही इसे बाउंड्रीवॉल से सुरक्षित कर दिया गया है. साथ ही इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, लेकिन जहां एक ओर अधिकारी इसे भविष्य की पहचान बता रहे हैं, वहीं किसानों और हमालों के मन में यातायात और शहर से बाहर होने पर कई तरह की शंकाएं और चिंताएं भी हैं.

पुरानी मंडी बनी समस्या

भाटापारा और आसपास के छह से अधिक जिलों के किसान हर साल यहां अपनी उपज बेचने आते हैं. यहां करीब एक हजार से अधिक राइस मिल, पोहा मिल और फूड प्रोसेसिंग यूनिट संचालित होती हैं, जिससे मंडी का आर्थिक महत्व और बढ़ जाता है. लेकिन शहर के बीचोबीच स्थित पुरानी मंडी 20 एकड़ में बनी थी, जो अब अतिक्रमण के कारण महज 9 एकड़ में सिमट गई है. जगह की कमी, बारिश में सेड की कमी, धान के भीगने और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं ने किसानों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं.

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नई मंडी होगी अत्याधुनिक

करीब 56 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही नई मंडी में सात कवर और चार ओपन ऑक्शन प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं. 200 मीट्रिक टन का गोदाम, 1500 वाहनों की पार्किंग और 300 गाड़ियों की एक साथ लोडिंग-अनलोडिंग क्षमता होगी. इसके अलावा व्यापारियों, किसानों, हमालों और रेजा के लिए अलग-अलग विश्राम गृह, कर्मचारियों के लिए 12 फ्लैट, सचिव का आवास, बैंक शाखा, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, कैंटीन और शौचालय जैसी सुविधाएं भी होंगी. मंडी परिसर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहेगा, वहीं बिजली सब स्टेशन, दो लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकियां और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं.

जाम से राहत, पर नई चिंताएं

अधिकारियों का मानना है कि नई मंडी से शहर को जाम की समस्या से राहत मिलेगी और किसानों-व्यापारियों का समय भी बचेगा. मंडी में होने वाली नीलामी की प्रक्रिया तेजी से होगी, जिससे किसानों को दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, लेकिन किसानों और हमालों की चिंता है कि नई मंडी शहर से दूर है. रोजाना वहां तक पहुंचने में समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे, जो छोटे किसानों और मजदूरों पर बोझ साबित हो सकता है.

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अधिकारियों का दावा

मंडी प्रशासन का दावा है कि नई मंडी प्रदेश की सबसे आधुनिक मंडियों में से एक होगी. यहां किसानों की फसल बारिश और मौसम की मार से बचेगी और नीलामी की पारदर्शी प्रक्रिया से उन्हें बेहतर दाम भी मिल सकेंगे. वरिष्ठ सचिव, कृषि उपज मंडी सी.एल. ध्रुव का कहना है कि नई मंडी में किसानों और व्यापारियों के लिए सभी सुविधाएं होंगी. इसका लाभ न केवल भाटापारा बल्कि आसपास के जिलों के किसानों को भी मिलेगा. भाटापारा की नई मंडी के पूरी तरह चालू होने के बाद यह सिर्फ किसानों और व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है.

पूर्व मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा ने कहा कि प्रदेश की पूर्व कांग्रेस सरकार के समय नए मंडी परिसर की नींव रखी गई है. सभी वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर इस मंडी का निर्माण 56 करोड़ की लागत से किया जा रहा है. मंडी नई परिसर में संचालित होने पर सुविधाएं बढ़ेंगी, किसानों और व्यापारियों के साथ शहर का विकास होगा.

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