Union Budget 2026-27: हर साल संसद में पेश होने वाला केंद्रीय बजट (Union Budget) देश की आर्थिक दिशा तय करता है. बजट भाषण के दौरान और उसके बाद विषय विशेषज्ञ और राजनेता कई ऐसे आर्थिक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें आम नागरिक समझ नहीं पाता. घाटे का बजट, वित्तीय घाटा, जीडीपी, प्रति व्यक्ति आय, व्यापार घाटा जैसे शब्द अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इनका वास्तविक अर्थ और प्रभाव आम लोगों के लिए स्पष्ट नहीं होता. ऐसे में जरूरी है कि बजट से जुड़ी इन शब्दावलियों को सरल भाषा में समझा जाए.
घाटे का बजट क्या होता है?
जब सरकार की कुल आय उसकी कुल व्यय राशि से कम होती है, तो उसे घाटे का बजट कहा जाता है. यानी सरकार जितना कमा रही है, उससे अधिक खर्च कर रही है. इस स्थिति में सरकार को कर्ज लेना पड़ता है. भारत जैसे विकासशील देशों में घाटे का बजट आम बात है, क्योंकि सरकार को विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च करना पड़ता है.
सरप्लस बजट
सरप्लस बजट उस स्थिति को कहते हैं जब सरकार की आय उसके खर्च से अधिक होती है. इस स्थिति में सरकार के पास अतिरिक्त धन बचता है, जिसे भविष्य की योजनाओं या कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि भारत में सरप्लस बजट बहुत ही कम देखने को मिलता है.
संतुलित बजट का अर्थ
संतुलित बजट वह होता है, जिसमें सरकार की आय और खर्च बराबर होते हैं. न तो घाटा होता है और न ही अतिरिक्त बचत. आर्थिक दृष्टि से इसे आदर्श स्थिति माना जाता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से इसे लागू करना मुश्किल होता है.
सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद, किसी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा पैमाना होता है. एक वित्तीय वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को GDP कहा जाता है. GDP से यह पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है और विकास की रफ्तार कैसी है.
प्रति व्यक्ति आय क्या बताती है
प्रति व्यक्ति आय, देश की कुल राष्ट्रीय आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाली जाती है. यह आंकड़ा यह संकेत देता है कि औसतन एक व्यक्ति की आय कितनी है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि सभी नागरिकों की वास्तविक आय समान हो, लेकिन इससे देश की आर्थिक स्थिति का मोटा अंदाजा लगाया जाता है.
राजस्व और उसके स्रोत
राजस्व सरकार की आय को कहा जाता है. इसके प्रमुख स्रोतों में प्रत्यक्ष कर जैसे इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स, अप्रत्यक्ष कर जैसे GST, कस्टम ड्यूटी, सरकारी कंपनियों से मिलने वाला लाभ, ब्याज और शुल्क शामिल होते हैं. बजट में राजस्व बढ़ाने पर खास जोर दिया जाता है.
राजस्व घाटा क्या दर्शाता है?
जब सरकार की राजस्व आय उसके रोजमर्रा के खर्चों को पूरा नहीं कर पाती, तो उसे राजस्व घाटा कहा जाता है. इसका मतलब है कि सरकार उधार लेकर वेतन, पेंशन और प्रशासनिक खर्च चला रही है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता.
वित्तीय घाटा
वित्तीय घाटा सरकार के कुल खर्च और कुल आय (कर्ज को छोड़कर) के अंतर को दर्शाता है. इसे बजट का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है. वित्तीय घाटा जितना अधिक होगा, सरकार को उतना ही अधिक कर्ज लेना पड़ेगा. यही वजह है कि सरकार वित्तीय घाटे को GDP के एक निश्चित प्रतिशत के भीतर रखने की कोशिश करती है.
प्राथमिक घाटा का मतलब
प्राथमिक घाटा, वित्तीय घाटे में से पुराने कर्ज पर दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची राशि को कहा जाता है. इससे यह पता चलता है कि सरकार मौजूदा वित्तीय वर्ष में कितना नया कर्ज ले रही है.
व्यापार घाटा क्या होता है?
जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक हो जाता है, तो उसे व्यापार घाटा कहते हैं. भारत में कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी के भारी आयात के कारण व्यापार घाटा अक्सर बना रहता है. अधिक व्यापार घाटा विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकता है.
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में अंतर
प्रत्यक्ष कर वे होते हैं, जिन्हें व्यक्ति या संस्था सीधे सरकार को चुकाती है, जैसे इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स. वहीं अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में शामिल होते हैं, जैसे GST. अप्रत्यक्ष कर का बोझ अंततः उपभोक्ता पर पड़ता है.
पूंजीगत व्यय का महत्व
पूंजीगत व्यय वह खर्च होता है, जो भविष्य में आर्थिक विकास को गति देता है. इसमें सड़क, रेलवे, पुल, स्कूल, अस्पताल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं शामिल होती हैं. सरकार पूंजीगत व्यय को दीर्घकालिक निवेश मानती है.
सब्सिडी क्या होती है?
सब्सिडी सरकार द्वारा आम जनता को दी जाने वाली आर्थिक सहायता होती है, ताकि आवश्यक वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें. खाद्य सब्सिडी, उर्वरक सब्सिडी और एलपीजी सब्सिडी इसके प्रमुख उदाहरण हैं. बजट में सब्सिडी का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा होता है.
बजट अनुमान और संशोधित अनुमान
बजट अनुमान आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का अनुमान होता है, जबकि संशोधित अनुमान चालू वर्ष के दौरान बदले गए आंकड़े होते हैं. इनसे यह पता चलता है कि सरकार की योजनाएं कितनी सफल रहीं.
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