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छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित, क्यों खास है कोपरा जलाशय?
छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित कर दिया गया है.
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बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय अब आधिकारिक तौर पर रामसर साइट घोषित किया गया है.
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कोपरा जलाशय न सिर्फ स्थानीय जल जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि यह प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों और वनस्पतियों का सुरक्षित ठिकाना भी है.
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यहां सर्दियों में दूर-दराज़ के देशों से पक्षी आते हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए खास बन जाता है.
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रामसर साइट अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि होती है.जो पर्यावरण संतुलन, जैवविविधता और जल संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम होती हैं.
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रामसर अभिसमय एक अंतर-सरकारी संधि है, जिसे 2 फरवरी, 1971 को कैस्पियन सागर के दक्षिणी तट पर स्थित ईरानी शहर रामसर में अपनाया गया था.
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जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों का संरक्षण करना है.
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इसे यूनेस्को द्वारा स्थापित एक अंतर-सरकारी पर्यावरण संधि 'वेटलैंड्स पर कन्वेंशन' के रूप में भी जाना जाता है.
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इसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया, जहां उस वर्ष सम्मेलन पर हस्ताक्षर किये गए थे.
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भारत में ये 1 फरवरी, 1982 को लागू किया गया. इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल के रूप में घोषित किया गया.
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भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल पश्चिम बंगाल का सुंदरबन है.
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भारत में कुल 95 रामसर स्थल है.
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सर्वाधिक साइटें तमिलनाडु में है, जिसकी संख्या 20 है.
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