सावन के दूसरे सोमवार को धर्मनगरी उज्जैन एक बार फिर शिवमय नजर आई. विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की दूसरी शाही सवारी पूरे वैभव, श्रद्धा और लोक संस्कृति की रंगत के साथ निकली. चांदी की पालकी में चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल ने नगर भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए, जबकि सड़कों पर उमड़े हजारों श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया. इस बार सवारी की थीम लोक नृत्य रही, जिसने धार्मिक आस्था के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की भी शानदार झलक पेश की.
सवारी शुरू होने से पहले महाकाल मंदिर के सभा मंडप में भगवान चंद्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया. मंत्री विजय शाह, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने पूजा में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया. पंडित घनश्याम पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन संपन्न कराया. इसके बाद बाबा महाकाल को चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में रजत पालकी में विराजित किया गया, जबकि मन महेश स्वरूप हाथी पर सवार रहे.
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ स्वागत
जैसे ही बाबा महाकाल की पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकली, सशस्त्र पुलिस बल ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी. इस दौरान "जय महाकाल" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा. मंदिर परिसर से लेकर सवारी मार्ग तक श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला.
फूलों की बारिश से गूंज उठा सवारी मार्ग
सावन की दूसरी सवारी के दर्शन के लिए शहर की सड़कों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी. जैसे ही बाबा महाकाल की सवारी श्रद्धालुओं के सामने पहुंची, लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया. भक्त हाथ जोड़कर बाबा का आशीर्वाद लेते नजर आए. पूरा सवारी मार्ग भक्ति, उल्लास और श्रद्धा के रंग में रंगा दिखाई दिया.
इस बार सवारी की विशेष थीम लोक नृत्य रही. झाबुआ से आए लोक कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत करते हुए सवारी के साथ चल रहे थे. अलग-अलग भजन मंडलियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाए रखा. महाकाल मंदिर बैंड और पुलिस बैंड भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे, जिन्हें देखने के लिए लोगों में खास उत्साह दिखाई दिया.
सोशल मीडिया और एलईडी रथ से हुए दर्शन
मंदिर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सवारी का सीधा प्रसारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया. इसके अलावा छह एलईडी रथों के माध्यम से भी सवारी का लाइव प्रसारण कराया गया, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें.
परंपरा के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर से निकली सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची. यहां शिप्रा नदी के पवित्र जल से भगवान महाकाल का पूजन और अभिषेक किया गया. वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच पूरा शिप्रा तट आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया. इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंची.
अगली सवारियों की थीम भी तय
महाकाल की पहली सवारी वैदिक उद्बोधन थीम पर निकली थी, जबकि दूसरी सवारी लोक नृत्य थीम पर आयोजित हुई. अब 17 अगस्त को निकलने वाली तीसरी सवारी में पुलिस, आर्मी, होमगार्ड और स्कूल बैंड की थीम रहेगी. 24 अगस्त की चौथी सवारी पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होगी. 31 अगस्त को पांचवीं सवारी में 84 महादेव की झांकियां आकर्षण का केंद्र बनेंगी. वहीं 7 सितंबर को निकलने वाली अंतिम राजसी सवारी में सिंहस्थ-2028 की विशेष झांकी प्रस्तुत की जाएगी. सभी सवारियों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले जनजातीय नृत्य दल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे.