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This Article is From Apr 16, 2025

Mahakal: महाकालेश्वर मंदिर पहुंची गायिका किंजल दवे, महाकाल के किए दर्शन, भस्म आरती में हुई शामिल

Kinjal Dave Mahakal Darshan: गायिका किंजल दवे उज्जैन पहुंची और बाबा महाकाल के दर्शन किए. इस दौरान वो भस्म आरती में शामिल हुईं और महाकाल का आशीर्वाद लिया. 

Mahakal: महाकालेश्वर मंदिर पहुंची गायिका किंजल दवे, महाकाल के किए दर्शन, भस्म आरती में हुई शामिल

Kinjal Dave Mahakal Mandir Darshan: गायिका और अभिनेत्री किंजल दवे बुधवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के द्वार पहुंचीं, जहां उन्होंने महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में शामिल हुईं. गुजराती गायिका महाकाल की भक्ति में डूबी नजर आईं. किंजल दवे ने नंदी हॉल में बैठ भगवान महाकालेश्वर की साधना की और चांदी द्वार से दर्शन पूजन कर उन्होंने महाकाल का आशीर्वाद लिया. 

अभिनेत्री किंजल दवे ने भगवान महाकालेश्वर की पूजा-अर्चना की

अभिनेत्री किंजल दवे ने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन के बाद खुशी जाहिर की. दर्शन-पूजन के पश्चात गायिका ने मंदिर समिति और मध्य प्रदेश सरकार को धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि वो बाबा के मंदिर पहली बार आई हैं और उन्हें अच्छे से दर्शन हुए.

उन्होंने कहा कि मैं भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर काफी खुश हूं. मैं यहां पहली बार आई हूं, पहली बार भस्म आरती में शामिल होकर काफी खुशी मिली है. बाबा का आशीर्वाद सभी पर बना रहे.

पुजारी श्रीराम ने गायिका को नीले रंग का पटका प्रसाद स्वरूप भेंट किया. बता दें कि किंजल दवे महाकाल पर भक्ति गीत 'जिसे मोह न माया जाल का वो भक्त है महाकाल का' भी गा चुकी हैं. इसके अलावा कई गुजराती फिल्मों में गाने गा चुकीं.

किंजल दवे का जन्म गुजरात के पाटण जिले में हुआ है. गायन के साथ ही किंजल अभिनय में भी निपुण हैं. वो फिल्मों में अभिनय भी कर चुकी हैं. किंजल दवे गायिका और अभिनेत्री के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय हैं. वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हैं.

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के लिए लगातार बॉलीवुड के कलाकार पहुंच रहे हैं. इससे पहले 30 मार्च को अभिनेता विंदु दारा सिंह महाकाल के दर्शन कर भस्म आरती में  शामिल हुए. उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे.

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का क्या है महत्व

महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती काफी लोकप्रिय है और इसमें शामिल होने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं. बता दें कि भस्म आरती का पौराणिक महत्व है. आरती में श्मशान से लाई गई चिता के भस्म से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है. चिता भस्म के अलावा इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल के लकड़ियों की राख को भी मिलाया जाता है.

क्यों महिलाओं को नहीं मिलती भस्म आरती में एंट्री

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के दौरान महिलाएं सिर पर घूंघट या दूपट्टा डाल लेती हैं. मान्यता है कि उस वक्त महाकालेश्वर निराकार स्वरूप में होते हैं इसलिए महिलाओं को आरती में शामिल न होने और न ही देखने की अनुमति है.

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