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This Article is From Apr 19, 2026

MP News: यहां थाने में भी होती है चोरी, थाने के परिसर में 2000 लीटर डीजल से भरा पिकअप टैंकर हो गया खाली

Madhya Pradesh news: कोर्ट के आदेश पर सुमित ने 1,81,630 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना सरकारी खजाने में जमा किया. उसे उम्मीद थी कि जुर्माना भरने के बाद उसकी गाड़ी और डीजल वापस मिल जाएगा, लेकिन जैसे ही सुमित चौकी पहुंचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने वहां देखा कि टैंकर का ताला बंद था, लेकिन अंदर तेल की एक बूंद तक नहीं थी.

MP News: यहां थाने में भी होती है चोरी, थाने के परिसर में 2000 लीटर डीजल से भरा पिकअप टैंकर हो गया खाली
यहां थाने में भी होती है चोरी, थाने के परिसर में 2000 लीटर डीजल से भरा पिकअप टैंकर हो गया खाली
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Madhya Pradesh News: कहते हैं कि चोर और पुलिस के बीच 36 का आंकड़ा होता है. लेकिन, मध्य प्रदेश के मऊगंज (Mauganj) जिले में चोरी और पुलिस के बीच गजब की जुगलबंदी नजर आ रही है. हालात ये है कि हनुमना थाना के पिपराही चौकी में 2000 लीटर डीजल से भरा पिकअप देखते ही देखते खाली हो गया. अब यह तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि पिकअप में रखा डीजल चोर चीर कर ले गया या पुलिस वाले ही चोर बन गए.

दरअसल, ये पूरा मामला हनुमना थाना अंतर्गत पिपराही चौकी का है. साल 2023 में पुलिस ने मऊगंज निवासी सुमित कुमार गुप्ता की पिकअप गाड़ी को 2000 लीटर डीजल के साथ जब्त किया था. अवैध परिवहन का आरोप लगा, मामला कलेक्टर कोर्ट पहुंचा. हालांकि, पीड़ित सुमित ने हार नहीं मानी, उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी. कोर्ट के आदेश पर सुमित ने 1,81,630 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना सरकारी खजाने में जमा किया. उसे उम्मीद थी कि जुर्माना भरने के बाद उसकी गाड़ी और डीजल वापस मिल जाएगा, लेकिन जैसे ही सुमित चौकी पहुंचा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. उसने वहां देखा कि टैंकर का ताला बंद था, लेकिन अंदर तेल की एक बूंद तक नहीं थी. जब सुमित ने थाने में गुहार लगाई, तो उसे जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. साहबों ने कह दिया कि डीजल उड़ गया'. अब सवाल यह है कि कड़े पहरे और बंद ताले के बीच 2000 लीटर डीजल कैसे उड़ सकता है?

जांच के घेरे में कई सवाल

इस पूरे मामले की सुई हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकड़े की ओर घूम रही है. काकड़े साहब का विवादों से पुराना नाता है. उन पर आरोप हैं कि एक हत्या के मामले में फाइल में आत्महत्या की कहानी रची गई, उस समय की तत्कालीन एसडीओपी अंकित सुल्या के पास खात्मा के लिए पहुंची, तो फाइल की बारीकी से जांच करने पर पीएम रिपोर्ट ने पूरे राज खोल दिए, जिसकी जांच अभी तक चल भी रही है. दूसरा पॉकेट गवाह का सिंडिकेट, महज 50 मिनट में 6 FIR दर्ज हो जाती हैं और गवाह भी 'सेट' होते हैं. चर्चा तो यहां तक है कि साहब को किसी बड़े रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है. तभी तो सैकड़ों संदिग्ध मामलों और उनके कारनामों में नाम आने के बाद भी उन पर आंच नहीं आई. जब किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त हो, तो भला काहे का डर. बस उसकी हां में ना नहीं निकलना चाहिए. बस उसी तरह का उदाहरण मऊगंज जिले के हनुमना थाना का है.

खुद को नियमों से समझते हैं ऊपर

दबदबा इतना कि नियमों की खुद उड़ाते धज्जियां उड़ाते हैं और लोगों को नियमों का पाठ कई पढ़ाते हैं. बिना नंबर का पर्सनल स्कॉर्पियो, ग्लास में लगा हुआ ब्लैक फिल्म जैसे इनके कारनामे आम है. जब खुद ही उल्लंघन करने पर जिम्मेदार उतारू हो जाए, तो भला किसी की मजाल कि कोई टस से मस भी करा सके.

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लिहाजा, पीड़ित सुमित गुप्ता दोहरी मार झेल रहा है. दरअसल, उनको साढ़े तीन लाख की चपत लग चुकी है और ऊपर से शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है. ऐसे में सवाल उस व्यवस्था का है, जिसे कानून का पालन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. अगर वही जनता की मेहनत की कमाई को 'उड़ाने वाली थ्योरी' के नाम पर पैसा डकारता रहेगा?

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