ग्वालियर कलेक्टर पर भड़का हाईकोर्ट, अवैध उत्खनन पर सख्ती; खदानों की ड्रोन वीडियोग्राफी के निर्देश

ग्वालियर के बिलौआ और रफादपुर में अवैध उत्खनन पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर पर नाराजगी जताई है. कोर्ट ने 8 अगस्त तक पूरे माइनिंग एरिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराकर 10 अगस्त तक सीडी और एफिडेविट पेश करने का सख्त आदेश दिया है.

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Gwalior illegal mining case high court slams collector drone videography order

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े क्रशर क्षेत्रों में शुमार ग्वालियर जिले के बिलौआ और रफादपुर स्थित क्रशर व खदान क्षेत्र को लेकर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष और अप्रसन्नता जाहिर की. राज्य शासन द्वारा एरियल (ड्रोन) वीडियोग्राफी कराने के लिए 7 दिन का अतिरिक्त समय मांगे जाने पर पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कलेक्टर का यह कृत्य इस अदालत की समझ से परे है.

कलेक्टर की ढिलाई और मशीने हटाने की आशंका पर कोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब यह तथ्य उजागर हो चुका है कि खनन कारोबारी अशोक सिंह यादव ने अपने साइट ऑफिस से पूरा मूल रिकॉर्ड गायब कर दिया है, तो कलेक्टर फिर से 7 दिन का समय क्यों मांग रहे हैं? इससे खनन कारोबारियों को साइट से अपनी भारी-भरकम मशीनरी हटाने का मौका मिल जाएगा. अदालत ने खदानों पर की गई ढीली कार्रवाई को लेकर भी प्रशासन को फटकार लगाई.

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कलेक्टर को ड्रोन वीडियोग्राफी कराने का आदेश

युगल पीठ ने ग्वालियर कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे शनिवार (8 अगस्त 2026) तक हर हाल में बिलौआ और रफादपुर के पूरे माइनिंग एरिया तथा क्रशरों की ड्रोन से एरियल वीडियोग्राफी सुनिश्चित कराएं. इसके बाद 10 अगस्त 2026 को इस वीडियोग्राफी की सीडी और अपना व्यक्तिगत हलफनामा (शपथ पत्र) कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा. कलेक्टर को अपने एफिडेविट में यह प्रमाणित करना होगा कि खनन क्षेत्र के एक-एक इंच और पूरे क्रशर एरिया को इसमें शामिल किया गया है.

खनन कारोबारी की खदान पर रोक, रिकॉर्ड सील

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खनन कारोबारी अशोक सिंह यादव की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए. हाईकोर्ट ने उनके द्वारा संचालित तीसरी खदान के परिचालन (खनन, ब्लास्टिंग, उत्खनन एवं पूर्व में निकाले गए खनिजों के परिवहन) पर तत्काल प्रभाव से एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है.

नए रजिस्टरों पर जताया असंतोष

साथ ही, साइट ऑफिस से गायब किए गए मूल रिकॉर्ड और कोर्ट में पेश किए गए नए रजिस्टरों पर असंतोष जताते हुए माना कि यह रिकॉर्ड हाल ही में तैयार किया गया है. संदिग्ध रजिस्टर और लोडिंग रसीदों को सीलबंद लिफाफे में अतिरिक्त महाधिवक्ता की सुरक्षित अभिरक्षा में सौंप दिया गया है.

हाईकोर्ट ने तय की टाइमलाइन

  • 8 अगस्त 2026 (शनिवार): माइनिंग एरिया व क्रशरों की ड्रोन से एरियल वीडियोग्राफी पूरी करने की अंतिम तिथि.
  • 10 अगस्त 2026: कलेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामे और सीडी के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी.
  • 14 अगस्त 2026: अवैध खनन व परिवहन रोकने के लिए हाईकोर्ट द्वारा प्रभावकारी गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.
  • 17 अगस्त 2026: नई गाइडलाइंस के बाद ही खदान दोबारा शुरू करने की अनुमति पर विचार किया जाएगा.