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Datia Cooperative Bank scam: दतिया सहकारी बैंक घोटाला: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सज़ा पर गरमाई सियासत, उठे ये गंभीर सवाल

दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक पुराने सहकारी बैंक घोटाले में बड़ा झटका लगा है. दरअसल, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और सहआरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को तीन वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई है. इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है. भाजपा ने इसे मामले पर कहा है कि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, जो सकती है विधायकी. वहीं, कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए फैसले की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं.

दतिया सहकारी बैंक घोटाला: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सज़ा पर गरमाई सियासत
Manoj goswami

Datia Co-operative Bank scam: मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक पुराने सहकारी बैंक घोटाले में बड़ा झटका लगा है. दरअसल, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें और सहआरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को तीन वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई है. करीब 25 साल पुराने इस मामले में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप साबित हुए हैं. हालांकि, अदालत ने दोनों दोषियों को राहत देते हुए अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय दिया है और इस अवधि के लिए अंतरिम जमानत भी मंजूर की है.

इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. एक ओर जहां बीजेपी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है. वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा बता रही है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर क्या फैसला आता है, और इसका आगे क्या असर पड़ता है.  

 क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक सहकारी बैंक से जुड़ा है, जिसमें वित्तीय गड़बड़ी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे. जांच के दौरान सामने आया कि बैंक से जुड़े लेनदेन में नियमों का उल्लंघन हुआ और आर्थिक अनियमितताएं की गईं. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए सज़ा सुनाई.

विधायकी पर भी संकट

इस फैसले के बाद राजेंद्र भारती की विधायकी पर भी खतरा मंडराने लगा है. कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि उच्च न्यायालय से उन्हें राहत (स्टे) नहीं मिलती है तो उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है.

 बीजेपी का आरोप

बीजेपी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह मामला भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़ा है और इसकी जानकारी पहले से थी. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों के अनुरोध पर ही मामला दिल्ली कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था. चतुर्वेदी के मुताबिक, अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो विधायक की सदस्यता जाना तय है.

 कांग्रेस का पलटवार

वहीं, प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने इस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव और विधायकों पर हो रही कार्रवाई की टाइमिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मुकेश नायक ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीति की संस्कृति को बदला जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले विपक्ष के प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कराने की कोशिश होती है, फिर फॉर्म वापस करवाने का दबाव बनाया जाता है और इसके बाद दल बदल की रणनीति अपनाई जाती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि इन प्रयासों में सफलता नहीं मिलती, तो नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है.

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मुकेश नायक ने अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग अलग नेताओं के मामलों में अलग अलग तरह के फैसले देखने को मिलते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में सज़ा के बावजूद वित्तीय अधिकारों पर रोक नहीं लगती, जबकि अन्य मामलों में मतदान और वेतन भत्तों पर रोक लगा दी जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के फैसले न्यायसंगत हैं?

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