मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की न्यायिक जांच का सिलसिला आखिरकार पूरा हो गया है. इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले में जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है और 600 से अधिक पन्नों की यह सीलबंद रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर पीठ) के सामने पेश कर दी. अब हाईकोर्ट में इस पर औपचारिक सुनवाई की जाएगी. रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इस मानवीय त्रासदी के लिए कौन-से अधिकारी, विभाग या व्यवस्थाएं सीधे तौर पर जिम्मेदार थीं.
36 लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों की तबीयत खराब हुई. अब जब मामले जांच आयोग की 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट पहुंची है तो उसमें दूषित पानी कांड की वजह और जिम्मेदार अधिकारियों को लेकर जांच की गई है.
हाईकोर्ट ने ही भागीरथपुरा मामले में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था. आयोग ने घटनाक्रम, पानी की गुणवत्ता, मेडिकल रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े दस्तावेज खंगाले हैं.
अब रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि दूषित पानी कांड के लिए जिम्मेदार कौन है? हाईकोर्ट में रिपोर्ट पर सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी. बता दें कि भागीरथपुरा कांड में मौतों के आंकड़े और उनकी वजह को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं.
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