छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सुदूर वनांचल इलाके के उड़ीसा सीमा पर घने जंगलों के बीच बसे भैसामुड़ा गांव में आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 और एक बरगद विशाल पेड़ का अनोखा नाता जुड़ा हुआ है. भैसामुड़ा गांव में लगाया गया आजादी के वक्त का वह पौधा आज पेड़ के रूप में बड़ा आकर ले चुका है. गांव वाले हर साल बरगद पर तिरंगा झंडा फहराते हैं. साथ ही इस पेड़ को बहुत सम्मान दिया जाता है.
15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली थी. वहीं, आजादी की खुशखबरी में गांव के बुजुर्गों ने यह बरगद का पौधा रोपा था और इसे बड़ी हिफाजत से बड़ा किया है. आज वह छोटा सा पौधा विशाल रूप ले चुका है. गांव वालों के अनुसार, गांव कr सभी बैठकें इसी पेड़ की छांव में होती है.

राष्ट्रीय पर्व पर दी जाती है सलामी
हर राष्ट्रीय पर्व में इस बरगद पर तिरंगा फहराया जाता है और सलामी दी जाती है. गांव की नई युवा पीढ़ी को आजादी का मान और मूल्य यह बरगद का पेड़ समझाता है. देश दुनिया में कई घटनाओं में यादगार के लिए स्मारक बनाए जाते हैं, लेकिन धमतरी का यह अनोखा गांव अपने आप में अनोखा बन गया है. इतिहास की बड़ी घटनाओं की याद ताजा करने के लिए यह पेड़ पर तिरंगा फहराया जाता है.
पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाने नहीं देते
बरगद का पेड़ 15 अगस्त 1947 को देश को मिली आजादी की याद दिलाने और देश को अंग्रेजों के गुलामी से मुक्त होने के बेहद शुभ अवसर को आज भी गांव वालों को याद दिलाता है. गांव का कोई भी व्यक्ति बरगद पेड़ को काटने या कुल्हाड़ी मारने नहीं देता है. इस पेड़ की अच्छे से देखभाल की जाती है और किसी भी व्यक्ति को पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाती.
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