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This Article is From Mar 28, 2026

Naxal Free India: 19 साल का खौफ खत्म! खून से लाल रहा गरियाबंद अब बना नक्सलियों की कब्रगाह

Naxal Free Gariaband India: छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला 19 साल के नक्सली आतंक से अब पूरी तरह मुक्त हो चुका है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई, 11 शहीदों के बलिदान और 36 नक्सलियों के खात्मे के बाद यहां शांति और विकास का नया दौर शुरू हुआ है.

Naxal Free India: 19 साल का खौफ खत्म! खून से लाल रहा गरियाबंद अब बना नक्सलियों की कब्रगाह

Naxal Free Gariaband India: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के घने जंगलों में कभी बारूद की गंध घुली रहती थी. करीब 19 सालों तक एक पूरी पीढ़ी ने नक्सलियों के लाल आतंक का दंश झेला. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. कभी दहशत का पर्याय रहा यह इलाका आज शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है. गरियाबंद अब सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि नक्सलवाद की कब्रगाह के रूप में अपनी नई पहचान बना चुका है.

2011: जब दहशत ने हिला दिया था गरियाबंद

साल 2011 की वो काली तारीख आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है. नक्सलियों ने ओडिशा में एम्बुश लगाकर गरियाबंद के 9 जवानों को शहीद कर दिया था. उसी साल जुगाड़ थाना क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के प्रथम गृहमंत्री नंदकुमार पटेल के काफिले पर कायराना हमला हुआ, जिसमें 7 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई.

दहशत का सिलसिला यहीं नहीं रुका. नक्सलियों ने तत्कालीन विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर हमला कर वहां से हथियार भी लूट लिए. उस दौर में हर दिन डर और अनिश्चितता का माहौल था.

2025: जब सुरक्षा बलों ने तोड़ा नक्सलियों का घमंड

यह जीत अचानक नहीं मिली. जनवरी 2025 में कुल्हाड़ी घाट के घने कोहरे के बीच सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 नक्सलियों को ढेर कर दिया. इस ऑपरेशन में एक करोड़ का इनामी जयराम उर्फ चलपती भी मारा गया.

इसके बाद सितंबर में मटाल की पहाड़ियों में एक और बड़ी सफलता मिली, जहां 10 नक्सलियों के साथ सीसी मेंबर बालकृष्ण उर्फ मनोज भी मारा गया. गरियाबंद प्रदेश का इकलौता जिला बन गया जहां एक ही साल में दो बड़े नक्सली कमांडर खत्म किए गए.

शांति की कीमत: 11 शहीदों का सर्वोच्च बलिदान

आज गरियाबंद में जो शांति दिख रही है, उसके पीछे बड़ी कीमत चुकाई गई है. 11 जवानों ने तिरंगे की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए. उनके बलिदान और सुरक्षा बलों की बहादुरी का ही नतीजा है कि अब तक 36 नक्सली मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी निशानी वो 36 लोग हैं, जिन्होंने कभी बंदूक उठाई थी, लेकिन अब सरेंडर कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं. ये लोग अब नए भारत के निर्माण में भागीदार बन रहे हैं.

अब ‘नया गरियाबंद': सुरक्षित और नक्सल मुक्त

करीब दो दशक तक चले खौफ का अंत हो चुका है. गरियाबंद अब नक्सल मुक्त और सुरक्षित है. यह जीत सिर्फ सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि उन 11 शहीदों और हजारों बुलंद हौसलों की है, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी.

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