उज्जैन में शिप्रा आरती को लेकर घमासान: प्रशासन पर भड़के तीर्थ पुरोहित, कहा- कमाई का जरिया बना रही सरकार

प्रशासन ने 2 दिन पहले शिप्रा आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को सौंप दी. शुक्रवार को जब मंदिर समिति के बटुकों ने आरती की तो पंडा समिति ने विरोध किया.

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मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती का मामला गार्माता जा रहा है. महाकाल मंदिर समिति द्वारा आरती करने के विरोध में शनिवार को तीर्थ पुरोहित और पंडे पुजारियों ने शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया. आरोप लगाया कि प्रशासन आस्था को कमाई का जरिया बनाना चाहता है, इसलिए मंदिर समिति को आरती कि जिम्मेदारी सौंपी और अब इवेंट की तरह टेंडर निकाल रहा है.

सर्वविदित है कि दो दिन पहले प्रशासन ने शिप्रा आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को सौंप दी है. इसी के चलते शुक्रवार को मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर आरती की तो पंडा समिति के पुरोहितों ने इसका जमकर विरोध कर दिया, लेकिन पुलिस के रहते उनकी नहीं चल पाई. इस पर एक दर्जन से अधिक तीर्थ पुरोहित और पंडे पुजारियों ने शनिवार शाम चार बजे रामघाट पर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह कर दिया.

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जल सत्याग्रह पर पंडा-पुजारी.

करीब एक घंटे तक चले इस आंदोलन के दौरान पंडे पुजारी हाथों में प्रशासन के खिलाफ बैनर लेकर खड़े रहे और श्लोक बोलते रहे. इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे.

सद्बुद्धि के लिए करेंगे यज्ञ

पंडा समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने कहा कि तीर्थ पुरोहित वर्ष 2015 से लगातार शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं. अब प्रशासन ने उसे आय का श्रोत बनाने के लिए आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को दे दी. यही नहीं इसके लिए टेंडर निकाल कर इवेंट कंपनी को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है, जबकि यह इवेंट नहीं हमारी आस्था है.

त्रिवेदी ने कहा कि आरती के हक के लिए लगातार विरोध करते रहेंगे शासन प्रशासन को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ भी करेंगे और तीर्थ पुरोहित अपनी परंपरानुसार शिप्रा आरती करते रहेंगे.

हरिद्वार की तर्ज पर आरती की तैयारी

इधर, प्रशासन का दावा है कि शिप्रा आरती को भव्य और हरिद्वार की तर्ज पर करने की तैयारी की जा रही है. इसी के चलते महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा आरती की नई शुरुआत की है. यह किसी की परंपरा खत्म करने का उद्देश्य नहीं है, बल्कि मंदिर समिति की ओर से एक नई व्यवस्था और नवाचार शुरू किया गया है. बता दें कि करीब दो माह पहले शिप्रा आरती के दौरान हुए पुजारी वेंडर के विवाद को देख प्रशासन ने व्यवस्था बदली है.

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