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MP: कुत्ते की समाधि पर बना है यह महादेव का मंदिर, कलचुरी काल में बना था, इसके पीछे छिपी है सदियों पुरानी कहानी

जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर कुकर्रामठ गांव में कलचुरी काल (6वीं से 13वीं शताब्दी) का यह प्राचीन मंदिर ASI के संरक्षण में है. गर्भगृह में लगभग 3 फीट ऊंचा प्राचीन शिवलिंग स्थापित है.

MP: कुत्ते की समाधि पर बना है यह महादेव का मंदिर, कलचुरी काल में बना था, इसके पीछे छिपी है सदियों पुरानी कहानी
डिंडौरी में कुत्ते की समाधि पर बना शिव मंदिर, सावन में खूब आते हैं श्रद्धालु.
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मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में स्थित एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर जिसकी पहचान सिर्फ उसकी ऐतिहासिकता नहीं, बल्कि उससे जुड़ी एक अनोखी लोककथा भी है. जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर कुत्ते की समाधि पर बना होने की मान्यता के कारण पूरे क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने पर व्यक्ति को हर प्रकार के ऋण से मुक्ति मिलती है. कलचुरी काल (लगभग छठी से तेरहवीं शताब्दी) का यह प्राचीन मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है. आखिर क्या है इस मंदिर के पीछे छिपी सदियों पुरानी कहानी...

सावन सोमवार पर ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. कांवड़िये नर्मदा का पवित्र जल लेकर यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर के गर्भगृह में लगभग तीन फीट ऊंचा प्राचीन शिवलिंग स्थापित है. माना जाता है कि यह मंदिर कलचुरी काल का है. इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित लोकमान्यता एक वफादार कुत्ते की है.

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सावन में श्रद्धालुओं की लग रही है भीड़.

क्या है इस मंदिर की कहानी

कहा जाता है कि वर्षों पहले लाखा नाम के एक बंजारे ने जरूरत पड़ने पर अपने कुत्ते को राजा के पास गिरवी रख दिया था. इसी दौरान राजमहल में चोरी हो गई, लेकिन कुत्ते की सूझबूझ से चोरी का पूरा सामान बरामद हो गया. कुत्ते की वफादारी से प्रभावित होकर राजा ने उसके गले में बंजारे के नाम एक संदेश बांधकर उसे मुक्त कर दिया, लेकिन जब कुत्ता अपने मालिक के पास पहुंचा तो बंजारे ने उसे महल से भागा हुआ समझकर मार डाला. बाद में गले में बंधा संदेश पढ़कर उसे अपनी भूल का एहसास हुआ.

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कुत्ते की बनवाई समाधि पर मंदिर

पश्चाताप स्वरूप उसने कुत्ते की समाधि बनवाई, जहां बाद में भगवान शिव का मंदिर स्थापित किया गया. स्थानीय लोग कुकर्रामठ गांव के नाम और ऋण मुक्तेश्वर मंदिर को इसी कथा का प्रमाण मानते हैं. महाशिवरात्रि पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.

फिलहाल बुनियादी सुविधाओं की कमी

आस्था और इतिहास का केंद्र होने के बावजूद यह प्राचीन धरोहर आज बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है. पर्यटन स्थल घोषित होने के बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. सावन के महीने में न सिर्फ डिंडोरी बल्कि अन्य जिलों से भी बड़ी तादात में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा आराधना करने से तमाम प्रकार के ऋणों से मुक्ति मिलती है साथ ही मनोकामना भी पूरी होती है. एहतियात के तौर पर कोतवाली पुलिस के जवानों की ड्यूटी मंदिर में लगाईं जाती है.

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