इंदौर के चर्चित अवंतिका गैस पाइपलाइन विस्फोट मामले में अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर पीठ) में दाखिल एक प्रशासनिक शपथ पत्र विवादों में आ गया है. आरोप है कि प्रशासन ने अदालत को बताया कि पीड़ितों को आर्थिक सहायता राशि का भुगतान कर दिया गया है, जबकि वास्तव में किसी भी पीड़ित को राशि मिली ही नहीं थी.
शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद जब मामला सामने आया, तो हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और प्रशासन को सात दिन के भीतर भुगतान कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया. हालांकि, एसडीएम घनश्याम धनगर का कहना है कि यह महज एक 'टाइपिंग की गलती' थी.
एयरलिफ्ट हुई थीं इन्फ्लुएंसर जिनी झाला
अवंतिका गैस पाइपलाइन विस्फोट में चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे. इनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जिनी झाला की हालत बेहद नाजुक होने पर, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें एयरलिफ्ट करके अहमदाबाद के जायडस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसी मामले में पीड़ितों के इलाज और मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है.
'गलत जानकारी से टूटेगा न्यायपालिका पर भरोसा'
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से दाखिल शपथ पत्र में दावा किया गया था कि सभी पीड़ितों को स्वास्थ्य सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है. लेकिन याचिकाकर्ता व हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रितेश ईनानी ने कोर्ट को बताया कि धरातल पर किसी भी पीड़ित को राशि का भुगतान नहीं हुआ है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यदि जिम्मेदार सरकारी अधिकारी ही अदालत में गलत जानकारी प्रस्तुत करेंगे, तो आम लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा.
हाईकोर्ट सख्त, सात दिन का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और स्पष्ट कहा कि न्यायालय पर जनता का गहरा विश्वास होता है, इसलिए अदालत के समक्ष हमेशा सत्य और सटीक जानकारी ही रखी जानी चाहिए. कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया कि सात दिन के भीतर सभी पीड़ितों को भुगतान सुनिश्चित कर अगली सुनवाई पर रिपोर्ट पेश की जाए.