ग्वालियर: बारिश का दौर शुरू होते ही ग्वालियर शहर और ग्रामीण अंचल में जहरीले जीवों का कहर अचानक बढ़ गया है. नदी-नालों के उफान और गड्ढों में पानी भरने के कारण सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में रिहाइशी इलाकों और घरों का रुख कर रहे हैं. इसके चलते अस्पतालों में सर्पदंश (स्नेक बाइट) के मामलों में अप्रत्याशित उछाल आया है.
अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य चिकित्सालय के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं. 1 जुलाई से लेकर 4 अगस्त तक जेएएच के मेडिसिन विभाग में सर्पदंश के 540 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 18 मरीजों की मौत हो चुकी है. वर्तमान में भी जेएएच के स्नेक बाइट आईसीयू में 15 मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.
डबरा और भितरवार में सर्पदंश से मौतें
ग्वालियर के डबरा में सर्पदंश से एक दिव्यांग अधेड़ व्यक्ति की मौत हो गई. वहीं भितरवार के ग्राम रई में तड़के शौच के लिए निकले कराज सिंह संधू को घास में छिपे सांप ने दोनों हाथों में डस लिया. दिव्यांग कराज सिंह किसी तरह हाथों के सहारे घर पहुंचे और परिजनों को जानकारी दी. परिजन उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया.
34 दिनों का खौफनाक आंकड़ा
जेएएच के अधीक्षक डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने बताया कि केवल जुलाई माह के 30 दिनों में स्नेक बाइट के 500 मरीज मेडिसिन विभाग पहुंचे, जिनमें से 15 की मौत हो गई. वहीं अगस्त के शुरुआती 4 दिनों में ही 40 नए मरीज भर्ती हुए हैं. गोले का मंदिर थाना क्षेत्र में मजदूरी करने वाली 35 वर्षीय हल्ली बाई को मंगलवार को सांप ने डस लिया था, जिसकी बुधवार को न्यू जेएएच में इलाज के दौरान मौत हो गई. इस महीने अब तक 3 मरीजों की जान जा चुकी है.
एक-एक मरीज को लगाने पड़ रहे 20-20 इंजेक्शन
विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों का जहर इतना खतरनाक है कि एक-एक मरीज को 20-20 एंटी-स्नेक वेनम के इंजेक्शन लगाने पड़ रहे हैं. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सर्पदंश के मरीजों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था है और एंटी-स्नेक वेनम पर्याप्त स्टॉक में उपलब्ध हैं.
झाड़-फूंक के चक्कर में गंवा रहे जान
गांधी प्राणी उद्यान के विशेषज्ञ गौरव परिहार ने बताया कि देश में पाए जाने वाले चार मुख्य जहरीले सांपों में से तीन ग्वालियर अंचल में पाए जाते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, सर्पदंश के मामलों में शुरुआती 'गोल्डन आवर' (पहला 1 घंटा) बेहद महत्वपूर्ण होता है. ग्रामीण इलाकों में लोग तुरंत अस्पताल भागने के बजाय झाड़-फूंक और देसी नुस्खों के चक्कर में समय बर्बाद कर देते हैं. समय पर एंटी-वेनम न मिलने से जहर पूरे शरीर में फैल जाता है, जिससे किडनी और श्वसन तंत्र फेल होने से मरीज की जान चली जाती है.