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This Article is From Apr 22, 2026

एमपी में कुपोषण से एक बच्ची की मौत पर मचा कोहराम, अब जुड़वा भाई गंभीर हालत में रीवा रेफर

Malnutrition Cases: जांच में सामने आया कि अस्पताल में भर्ती दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण यानी सैम श्रेणी में थे. उनका वजन सामान्य से बेहद कम पाया गया. इलाज के दौरान जुड़वा बहन ने दम तोड़ दिया, जबकि भाई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है.

एमपी में कुपोषण से एक बच्ची की मौत पर मचा कोहराम, अब जुड़वा भाई गंभीर हालत में रीवा रेफर

Malnutrition Case in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां विकासखंड के चित्रकूट क्षेत्र के सुरांगी गांव से कुपोषण की एक बार फिर भयावह तस्वीर सामने आई रही है. चार माह के जुड़वा बच्चों में से मासूम बहन प्रांसी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उसका भाई जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है. फिलहाल, भाई नैतिक को हायर सेंटर रीवा रेफर कर दिया गया है.

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं और जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, मीडिया के सवालों से बचने के लिए अफसरों ने फोन रिसीव करना बंद कर दिया.

जांच में दोनों बच्चे पाए गए गंभीर कुपोषण के शिकार

जानकारी के अनुसार सुरांगी के पथरा गांव निवासी नत्थू के जुड़वा बच्चे लंबे समय से बीमार थे. परिजन उनका इलाज गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर से करवा रहे थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ. स्थिति बिगड़ने पर बीते मंगलवार को उन्हें मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. जहां प्राथमिक इलाज के बाद दोनों बच्चों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती करने के बाद जांच में सामने आया कि दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण यानी सैम श्रेणी में थे. उनका वजन सामान्य से बेहद कम पाया गया. इलाज के दौरान जुड़वा बहन ने दम तोड़ दिया, जबकि भाई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है.

पहले भी कुपोषण से हो चुकी है मौत

जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों को मां का दूध नहीं मिल रहा था और उन्हें बकरी व गाय का दूध पिलाया जा रहा था, जो इस उम्र में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है. समय पर सही पोषण और इलाज न मिलने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई. मझगवां में कुपोषण से मौत कोई पहली बार नहीं है. यहां चार साल पहले भी सोमवती नाम की लड़की कुपोषण से दम तोड़ चुकी है. वहीं, अब प्रांसी की जान चली गई है. करीब 20 दिन पहले एक लड़की की भी जान जा चुकी है. वहीं, नैतिक की हालत नाजुक बनी हुई है.

सवालों में घिरा विभाग

परिवार के गांव में ही रहने के बावजूद बच्चों की स्थिति पर न तो आंगनबाड़ी और न ही स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय निगरानी दिखी. परिजनों का कहना है कि टीकाकरण के अलावा उन्हें किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला और न ही आशा कार्यकर्ता की ओर से नियमित संपर्क किया गया.

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हाल ही में इसी विकासखंड में कुपोषण से एक अन्य बच्चे की मौत का मामला सामने आ चुका है. इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है.

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