इंदौर को कला, संस्कृति और रंगमंच की नई पहचान देने के लिए जिस कला संकुल की परिकल्पना की गई थी, आज वही परियोजना अपनी बदहाली की वजह से चर्चा में है. एमजी रोड स्थित मराठी स्कूल परिसर में बन रहा 55 करोड़ रुपये का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा नहीं हो सका और पिछले करीब एक साल से इसका निर्माण कार्य बंद पड़ा है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधूरी इमारत, बिखरी निर्माण सामग्री, खुले बिजली के तार और खराब होती संरचना अब इस परियोजना की हकीकत बयां कर रही है. ऐसे में शहर के लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इंदौर के सांस्कृतिक भविष्य से जुड़ा यह बड़ा सपना कब पूरा होगा.
समय सीमा बीती, लेकिन प्रोजेक्ट अब भी अधूरा
एमजी रोड स्थित मराठी स्कूल परिसर में तैयार किया जा रहा कला संकुल मई 2025 तक पूरा होना था. लेकिन निर्धारित समय निकल जाने के बाद भी परियोजना अधूरी है. निर्माण कार्य करीब एक साल से रुका हुआ है, जिसके कारण परिसर की हालत लगातार खराब होती जा रही है. मौके पर पहुंचने पर साफ दिखाई देता है कि काम लंबे समय से बंद पड़ा है.
55 करोड़ की योजना, 25 करोड़ का काम पूरा
करीब 55 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में अब तक लगभग 25 करोड़ रुपये का सिविल कार्य पूरा किया जा चुका है. हालांकि इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल और फिनिशिंग का काम अब भी बाकी है. इन कार्यों के रुकने से पूरी परियोजना अधर में लटक गई है और तैयार हो चुकी संरचना भी धीरे-धीरे खराब होने लगी है.
कलाकारों के लिए बनने वाला था आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र
इस कला संकुल को इंदौर का बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बनाने की योजना थी. यहां 550 सीटों वाला आधुनिक ऑडिटोरियम, 500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर एम्फी थिएटर, 400 लोगों की क्षमता वाला मल्टीपरपज हॉल, डांस और ड्रामा हॉल, आर्ट गैलरी और लाइब्रेरी बनाई जानी थी. इसके अलावा कलाकारों के लिए ग्रीन रूम, डोरमेट्री, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, पार्किंग और कला से जुड़ी दुकानों की भी व्यवस्था प्रस्तावित है. लेकिन फिलहाल यह सारी सुविधाएं कागजों और अधूरे निर्माण तक ही सीमित हैं.
परिसर में दिख रही अव्यवस्था और लापरवाही
अधूरे पड़े परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं दिखाई देती. कई स्थानों पर बिजली के खुले तार लटके हुए हैं. मुख्य प्रवेश द्वार झाड़ियों से घिरा हुआ है. फर्श की टाइल्स उखड़ने लगी हैं, सीढ़ियों पर टूट-फूट के निशान दिख रहे हैं और रैंप तथा गलियारों में गंदगी जमा है. बेसमेंट पार्किंग में भी धूल, कचरा और निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है, जिससे पूरे परिसर की स्थिति चिंताजनक नजर आती है.
फंड की कमी से रुका निर्माण कार्य
स्मार्ट सिटी कंपनी के अनुसार भुगतान नहीं होने के कारण निर्माण कार्य रोकना पड़ा. परियोजना को पूरा करने के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) से अतिरिक्त फंड की मांग की गई है. जब तक आवश्यक राशि उपलब्ध नहीं होती, तब तक काम दोबारा शुरू होने की संभावना कम नजर आ रही है.
सरकारी निवेश पर उठ रहे सवाल
परियोजना पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण इसका लाभ शहर को नहीं मिल पा रहा है. समय के साथ भवन की स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिससे लोगों के बीच सरकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली और निवेश की उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
आईडीए को सौंपने की तैयारी
निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि यह परियोजना स्मार्ट सिटी के माध्यम से शुरू की गई थी, लेकिन फंड की कमी के कारण इसका काम अधूरा रह गया. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को आईडीए के माध्यम से पूरा करवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. आईडीए ने भी इस संबंध में शासन से अनुमति मांगी है. अनुमति मिलते ही आईडीए परियोजना को अपने हाथ में लेकर आगे का काम शुरू करेगा.