MP: जान जोखिम में डाल स्कूल जा रहे बच्चे, हर दिन नंगे पैर नदी पार करते हैं मासूम

देश और प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने और हर बच्चे तक सुरक्षित शिक्षा पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन देवास जिले की जनपद पंचायत खातेगांव के अंतर्गत आने वाली पटरानी ग्राम पंचायत से सामने आई तस्वीर इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है.

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रोज़ उफनती नदी पार कर स्कूल जाते हैं मासूम.
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मध्य प्रदेश में विदिशा के बाद देवास जिले का भी एक वीडियो सामने आया है, जहां बच्चे पैदल ही नदी पार करके स्कूल जा रहे हैं. घर से स्कूल पहुंचने तक का सफर एकदम जानलेवा है. मानसून में जब तेज और लगातार बारिश होती है तो नदी उफान पर होती है, जिस वजह से पानी का स्तर बढ़ जाता है.

दरअसल, यह हाल जिला पंचायत खातेगांव के पटरानी गांव का है. गांव के बच्चे स्कूल जाने के लिए मजबूरन जामनेर नदी को पैदल पार करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पुल बनाने के लिए तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन पुल का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है.

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नदी को पार कर रहे बच्चे.

खींवनी खुर्द से पटरानी गांव स्थित स्कूल जाने के लिए इस रास्ते से हर दिन 15 से 20 छात्र-छात्राएं नदी पार करते हैं. वह अपना भविष्य संवारने के लिए जान जोखिम उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर कोई भी सुनने वाला नहीं है.

विदिशा का भी आया था कुछ ऐसा ही वीडियो

कुछ दिनों पहले विदिशा जिले में बेतवा नदी पर टूटे डैम को पैदल पार करते बच्चों का भी वीडियो सामने आया था. नीचे उफनाती नदी का पानी तेजी से बह रहा था. जान जोखिम में डाल कर स्कूल जा रहे बच्चों का वीडियो सामने आने पर उसका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: ही संज्ञान लिया था.

दरअसल, ककरुआ गांव में केवल आठवीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था है. इसके बाद छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए पलोह हाई स्कूल जाना पड़ता है. कई छात्रों के पास साइकिल भी है, इसके बावजूद कुछ बच्चे शॉर्टकट अपनाते हैं. स्कूल जल्दी पहुंचने की कोशिश में वे बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के टूटे हुए हिस्से से होकर निकलते हैं, जहां करीब 4 फीट का गैप है. बारिश के दिनों में यह रास्ता और ज्यादा खतरनाक हो जाता है.

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