मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को बड़वानी जिले में जनहित से जुड़े कामों में कथित लापरवाही पर सात अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए जिनमें जनपद पंचायत का एक मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शामिल है. सीएम ने बड़वानी में ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान' के तहत जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में आम लोगों से सीधे संवाद करके उनकी समस्याएं सुनीं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं का लाभ तय समय-सीमा में मिलना चाहिए और जनता की शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा, जबकि लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करके कार्रवाई की जाएगी.
इन पर हुई कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), संबल योजना और अन्य शासकीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में कथित लापरवाही पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए. इनमें तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार, दो पटवारी-मांगीलाल नरगांवे और ललित बोरसे, दो मुख्य नगर पालिका अधिकारी-मायाराम सोलंकी और जगदीश धांगड़, सहायक इंजीनियर राजू डावर और जनपद पंचायत के सीईओ सौरभ सिंह राठौर शामिल हैं.
नर्मदा पर नए घाटों पर निर्माण के लिए दिए 25 करोड़
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. मुख्यमंत्री ने बड़वानी जिले के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं. उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी पर पहले बनाए गए घाट सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam) के ‘बैकवॉटर' (बांध की दीवार से टकराकर लौटने वाला पानी) में डूब गए हैं और नए घाटों के निर्माण के लिए 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेंधवा कस्बे के किले समेत जिले के ऐतिहासिक स्थलों को पुरातत्व विभाग के माध्यम से संरक्षित किया जाएगा. उन्होंने जिले में आदर्श कृषि उपज मंडी के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की मंजूरी की घोषणा की और यह भी कहा कि खेल मैदानों को अत्याधुनिक खेल परिसरों के रूप में विकसित किया जाएगा.
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